कान्हा आओ तो सही श्याम कृष्णा भजन

कान्हा आओ तो सही श्याम कृष्णा भजन


कान्हा आओ तो सही,
श्याम आओ तो सही,
सेवा कुंज में,
राधा रानी अकेली खड़ी,
कान्हा आओ तो सही।

कहो तो कन्हैया मैं,
कुंडल बन जाऊँ,
कानों में रहकर,
तेरी शोभा बढ़ाऊँ,
कान्हा आओ तो सही,
श्याम आओ तो सही,
सेवा कुंज में,
राधा रानी अकेली खड़ी,
कान्हा आओ तो सही।

कहो तो कन्हैया मैं,
माला बन जाऊँ,
गले की शोभा बन,
हृदय से लग जाऊँ,
कान्हा आओ तो सही,
श्याम आओ तो सही,
सेवा कुंज में,
राधा रानी अकेली खड़ी,
कान्हा आओ तो सही।

कहो तो कन्हैया,
तेरी बंसी बन जाऊँ,
हाथों में रहकर,
अधरों पर सज जाऊँ,
कान्हा आओ तो सही,
श्याम आओ तो सही,
सेवा कुंज में,
राधा रानी अकेली खड़ी,
कान्हा आओ तो सही।

कहो तो कन्हैया,
पागल ममता हो जाऊँ,
चरणों में रहकर,
अपना जीवन बिताऊँ,
कान्हा आओ तो सही,
श्याम आओ तो सही,
सेवा कुंज में,
राधा रानी अकेली खड़ी,
कान्हा आओ तो सही।

साढ़े एक वारी आजा ओ,
रंगीले रसिया,
ओ रंगीले रसिया,
ओ छबीले रसिया।



कान्हा आओ तो सही शाम को तो सही रसिक‌ पागल‌ मामा Kanha Aao To Sahi Bhajan

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सेवा कुंज की वो शांत गलियाँ, जहाँ राधा रानी अकेली खड़ी हैं, आँखों में बस एक ही आस—कान्हा आ जाओ, श्याम आ जाओ। दिल कहता है, बस एक बार आओ तो सही, देख लो ये व्याकुलता, ये प्रेम की वो पुकार जो साँसों में घुली है। राधा जी तैयार हैं हर रूप में खुद को बदलने को—कुंडल बनकर कानों में लटक जाना, माला बनकर गले से लग जाना, बंसी बनकर अधरों पर सज जाना। इतना प्रेम है कि वो खुद को पागल ममता कहकर चरणों में बिछ जाना चाहती हैं, जीवन भर बस सेवा में गुजार देना चाहती हैं।

फिर वो पुकार उठती है—साढ़े एक बार ही सही, आ जाओ ओ रंगीले रसिया, ओ छबीले रसिया। बस एक झलक, एक मुस्कान, एक स्पर्श—ये काफी है। क्योंकि राधा का प्रेम इतना गहरा है कि वो कान्हा के आने का इंतजार नहीं, उनकी एक आहट को भी पूजा मान लेती हैं। सेवा कुंज में वो खड़ी हैं, फूलों की माला हाथ में, मन में बस एक ही नाम—कान्हा, श्याम, रसिया। आ जाओ तो सही, क्योंकि ये प्रेम कभी थकता नहीं, बस पुकारता रहता है। आप सभी पर ईश्वर की कृपा बनी रहे। जय श्री कृष्ण जी की।
 
हमारे प्यारे कान्हा यानी भगवान श्रीकृष्ण के बहुत सारे नाम हैं, लेकिन सबसे ज्यादा प्यारे और आमतौर पर इस्तेमाल होने वाले दस नाम ये हैं। कृष्ण नाम का मतलब है वो जो सबको अपनी ओर आकर्षित कर लेता है, जैसे कोई मैग्नेट सबको खींच लेता है। कान्हा वो प्यारा नाम है जो यशोदा माँ ने बहुत लाड़-प्यार से दिया, मतलब छोटा-सा प्यारा बच्चा। गिरिधर या गिरिधारी कहलाते हैं क्योंकि इन्होंने गोवर्धन पर्वत को अपनी छोटी उंगली पर उठा लिया था। मुरलीधर मतलब वो जो हमेशा बांसुरी हाथ में लिए रहते हैं और उसे बजाते हैं। गोपाल नाम से जाना जाता है क्योंकि ये गायों की देखभाल करते थे और उनका रक्षक थे। गोविंद या गोविन्द कहते हैं क्योंकि ये गायों को सुख देते हैं या इंद्रियों को काबू में रखने वाले हैं। माधव नाम है क्योंकि ये वसंत के स्वामी हैं या लक्ष्मी जी के पति हैं। मधुसूदन कहलाते हैं क्योंकि इन्होंने मधु नाम के राक्षस का संहार किया था। मुकुंद वो हैं जो हमें बंधनों से मुक्ति दिलाते हैं, मोक्ष देने वाले हैं। और केशव नाम सुंदर बालों वाले या इंद्रियों को नियंत्रित करने वाले के लिए है।
 
Saroj Jangir Author Author - Saroj Jangir

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