मोरिया आछ्यो बोल्यो रै ढळती रात सोंग

मोरिया आछ्यो बोल्यो रै ढळती रात राजस्थानी सोंग मीनिंग

सावन के आगमन पर मोर बोलने लग जाते हैं, जो एक और सावन का शुभ संकेत होता है वहीँ पर मोर और मोरनी के मिलन का वक़्त भी होता है। नायिका अकेली है, उसका नायक उसके पास नहीं है। वह मोर से संवाद करती है की तुम क्यों बोल रहे हो ? तुम्हारे बोलने से मेरे हृदय पर कटार/ चाक़ू जैसा चल रहा है। तुम (मोर) पीहू पीहू की वाणी/बोली छोड़ दो, मेरे प्रिय मेरे पास नहीं हैं। इस फोक सांग का हिंदी अर्थ निचे दिया गया है।
 
Moriya Aachho Bolyo Re Dhalati Raat

मोरिया आछ्यो बोल्यो रै ढळती रात में,
म्हारें हिवड़े में बहगी रै कटार,
मोरिया आछ्यो बोल्यो रै ढ़लती रात में,
मोरिया आछो बोल्यो रे ढळती रात में।

डावड़ी मैं तो बोल्यो रे म्हारी मौज में,
थारे किण विध बहगी रै कटार, डावड़ी,
मैं तो बोल्यो रे म्हारी मौज़ में,
मोरिया आछो बोल्यो रे ढळती रात में।

मोरियां पीहू पीहू की वाणी छोड़ दे,
म्हारां पीव जी बसे परदेस मोरिया,
पीहू पीहू की वाणी छोड़ दे,
मोरिया आछो बोल्यो रे ढळती रात में।

डावड़ी पीहू पीहू की वाणी बोल स्यूं,
म्हारे मौज़ उठे दिन रात डावड़ी,
पीहू पीहू की वाणी बोल स्यूं,
मोरिया आछो बोल्यो रे ढळती रात में।

मोरिया थारे बागां में काई काई नीपजै,
ज्यामें आवे हैं, सुगन्धी बांस मोरिया,
थारे बागां में काई काई नीपजे,
मोरिया आछो बोल्यो रे ढळती रात में।

मोरनी, म्हारे बागां में मरवो केवड़ो,
जीकी आवे रै, सुगन्धि बास मोरनी
म्हारे बागां में मरवो कवडो,
मोरिया आछो बोल्यो रे ढळती रात में।

मोरियाँ आछो बोल्यो रै ढळती रात में,
म्हारे हिवड़े में बहगी रै कटार,
मोरिया आछ्यो बोल्यो रै ढ़लती रात में,
मोरिया आछो बोल्यो रे ढळती रात में। 

मोरिया आछ्यो बोल्यो रै ढळती रात में : मोरिया (मोर) तुम ढलती रात में क्यों बोल रहे हो। आछो बोल्यो से एक व्यंग्यात्मक भाव है। जैसे की कोई जब अच्छा माना जाय और वह गलती करे तो हम कहते हैं की क्या खूब काम किया है, ऐसा कहने पर हमारा आशय उसे उसकी गलती पर ध्यान दिलाना होता है। ऐसे ही मोरिया आछो बोल्यो रे से आशय है की तुमको नहीं बोलना चाहिए।
म्हारें हिवड़े में बहगी रै कटार : मोरिया, तुम्हारे बोलने से मेरे हृदय पर कटार जैसी चल गई है। बहगी -चल गई है।
डावड़ी मैं तो बोल्यो रे म्हारी मौज में : डावड़ी -हंसी ठिठोली का अभिवादन। डावड़ी मैं तो अपनी मस्ती में बोल रही हूँ।
थारे किण विध बहगी रै कटार, डावड़ी : तुम्हारे किस विधि/किस प्रकार से, हृदय में कटार चल गई है।
मैं तो बोल्यो रे म्हारी मौज़ में : मैं तो अपने शरूर में बोल रहा हूँ। मौज़ -ख़ुशी/शरूर में बोलना।
मोरियां पीहू पीहू की वाणी छोड़ दे : मोरिया तुम पीहू पीहू की वाणी को बोलना छोड़ दो।
म्हारां पीव जी बसे परदेस मोरिया : मेरे पीव / प्रिय (पति) परदेस में बसते हैं, रहते हैं।
डावड़ी पीहू पीहू की वाणी बोल स्यूं : मैं तो पीहू पीहू की वाणी बोलूंगा।
म्हारे मौज़ उठे दिन रात डावड़ी : मेरे तो दिन और रात में मौज उठती है।
मोरिया थारे बागां में काई काई नीपजै : नायिका मोर से पूछती है की तुम्हारे बाग़ में क्या क्या पैदा होता है, निपजता - पैदावार होना।
ज्यामें आवे हैं, सुगन्धी बांस मोरिया : ऐसा क्या पैदा हो रहा है जिसके कारण सुगंध बांस (बाँस -सुगधित हवा, महक, खुशबू ) चारो तरफ फ़ैल कर आ रही है।
मोरनी, म्हारे बागां में मरवो केवड़ो : मोरनी (नायिका) मेरे बाग़ में मरवो (एक तरह का सुगन्धित पादप) और केवड़ा पैदा होता है। केवड़ा और मरवा दोनों ही सुगन्धित पादप होते हैं।
जीकी आवे रै, सुगन्धि बास मोरनी : जिसकी (जीकी ) सुगन्धित बांस आ रही है। 


Moriya Aacho Bolyo Re | Best Dance Song Ever - Seema Mishra | Rajasthani Song
 
Moriya Aachhyo Bolyo Rai Dhalati Raat Mein,
Mhaaren Hivade Mein Bahagi Rai Kataar,
Moriya Aachhyo Bolyo Rai Dhalati Raat Mein,
Moriya Aachho Bolyo Re Dhalati Raat Mein. 

Song: Moriya Aacho Bolyo Re 
Album: Ghoomar 2
Producer: K.C.Maloo
Singer: Seema Mishra, Rakesh Kala 
Music: Ramlal Mathur
Lyrics Traditional 
Label: Veena Music
Copyright: Oriental Audio Visual Electronics
Release Date: 13-Oct-2000
Saroj Jangir Author Author - Saroj Jangir

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