ग्वाला बालां दे सिरमौर कन्हाई ने

ग्वाला बालां दे सिरमौर कन्हाई ने


ग्वाला बालां दे सिरमौर कन्हाई ने
ग्वालां बालां दे सिरमौर कन्हाई ने,
धुम्मा पाइयां मक्खन चोर कन्हाई ने।

छैल छबीला रसिया रंग रंगीला ऐ,
नवियां नवियां करदा रेहन्दा लीला ए।
नटवर नागर नंद किशोर कन्हाई ने,
धुम्मा पाइयां मक्खन।

मन मेरा मोह लैंदा जद मुरली वजांदा ऐ,
वस्स कर लैंदा ऐसा जादू पांदा ऐ।
राधा रमण हरि चितचोर कन्हाई ने,
धुम्मा पाइयां मक्खन।

रासां पांदां सबनू नाच नचांदा ऐ,
मक्खन गोपियां दा ऐ लुट लुट खांदा ऐ।
वृंदावन दे बांके मोर कन्हाई ने,
धुम्मा पाइयां मक्खन।

कहे "मधुप" हरि दे खेल न्यारे ने,
अपने भक्तां दे सब कम सवारे ने।
रखी हथ विच सब दी डोर कन्हाई ने,
धुम्मा पाइयां मक्खन।


Gawaalan Baalan De Sirmor Kanhayi Ne |Tinu Singh| |Phagwara PB| |Radha Krishan Bhajans|

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Gawaalan Baalan De Sirmor Kanhayi Ne |Tinu Singh| |Phagwara PB| |Radha Krishan Bhajans| भजन लेखक : सुप्रसिद्ध भजन लेखक एवम संकीर्तन आचार्य श्री केवल कृष्ण मधुप (मधुप हरि) जी अमृतसर, पंजाब

कन्हैया ग्वाल-बालों के सिरमौर, यानी सबसे प्रिय और अग्रणी हैं। उनकी शरारतें, विशेषकर माखन चोरी, पूरे ब्रज में धूम मचाए रहती हैं। उनका छैल-छबीला, रसिया और रंगीला स्वभाव हर किसी को आकर्षित करता है। हर दिन उनकी कोई नई लीला, नई शरारत सामने आती है, जिससे ब्रजवासियों का जीवन रंगीन और आनंदमय हो जाता है।

कृष्ण जब मुरली बजाते हैं, तो मन को पूरी तरह मोह लेते हैं। उनकी बांसुरी की धुन में ऐसा जादू है कि हर कोई उनके वश में हो जाता है—चाहे ग्वाल-बाल हों, गोपियाँ हों या स्वयं राधा। कृष्ण का हर रूप, हर अदा, हर मुस्कान मन को चुरा लेती है। वे चितचोर भी हैं, राधा रमण भी हैं—उनका प्रेम और आकर्षण सब पर छाया रहता है। रासलीला में कृष्ण सबको अपनी लय में नचाते हैं, और गोपियों के साथ माखन की मस्ती में लीन रहते हैं। वृंदावन के बांके बिहारी, सिर पर मोर मुकुट सजाए, हर दिल में बस जाते हैं। उनकी माखन चोरी की लीलाएँ, गोपियों के साथ छेड़छाड़, और रास की मस्ती, ब्रज के जीवन को रस से भर देती है।

"मधुप" कहता है कि कृष्ण की लीलाएँ निराली हैं—वे अपने भक्तों के हर काम को सहजता से संवारते हैं। हर किसी की डोर उनके हाथ में है, और वे अपने प्रेम, करुणा और लीला से सबको जीवन का असली आनंद चखाते हैं। उनके बिना ब्रज की कल्पना अधूरी है, और उनका प्रेम हर भक्त के लिए सबसे बड़ा सहारा है।

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Saroj Jangir Author Author - Saroj Jangir

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