बरस रही प्रभु की कृपा अपार राम भजन
बरस रही प्रभु की कृपा अपार राजन जी महाराज भजन
प्रभु सभ में समभाव विराजे,सब का करे उद्धार,
बरस रही प्रभु की कृपा अपार।
(प्रभु सब में समभाव बिराजै,
सब का करे उद्धार,
बरस रही प्रभु की कृपा अपार)
कान मिले सत्संग सुनने को
नयन मिले दरशन करने को
हाथ मिले सेवा करके नर,
मानव जनम सुधार,
बरस रही प्रभु की कृपा अपार।
(प्रभु सभ में समभाव बिराजै,
सब का करे उद्धार,
बरस रही प्रभु की कृपा अपार)
जीभ मिली हरिनाम जपन को,
बुद्धि मिली है, श्रवन मनन को,
श्रवन मनन नित्य अध्ययन करके,
हो जा भव से पार,
बरस रही प्रभु की कृपा अपार।
(प्रभु सभ में समभाव बिराजै,
सब का करे उद्धार,
बरस रही प्रभु की कृपा अपार)
धन यौवन का मान ना कीजे,
मानव जनम सफल कर लीजे,
राम नाम का सुमिरण करके,
हर में हरि निहार,
बरस रही प्रभु की कृपा अपार।
(प्रभु सभ में समभाव बिराजै,
सब का करे उद्धार,
बरस रही प्रभु की कृपा अपार)
सत्संग सेवा सुमिरन कर ले,
श्रद्धा भक्ति से जीवन भर ले,
राम कथा की गंगा नहाने,
भिक्षु कहे पुकार,
बरस रही प्रभु की कृपा अपार,
(प्रभु सभ में समभाव बिराजै,
सब का करे उद्धार,
बरस रही प्रभु की कृपा अपार)
प्रभु सभ में समभाव विराजे,
सब का करे उद्धार,
बरस रही प्रभु की कृपा अपार,
(प्रभु सब में समभाव बिराजै,
सब का करे उद्धार,
बरस रही प्रभु की कृपा अपार)
बरस रहि प्रभु की कृपा अपार। पूज्य राजन जी संपर्क सूत्र- +919831877060, +919038822776.
Prabhu Sabh Mein Samabhaav Viraaje,
Sab Ka Kare Uddhaar,
Baras Rahi Prabhu Ki Krpa Apaar.
(Prabhu Sab Mein Samabhaav Biraajai,
Sab Ka Kare Uddhaar,
Baras Rahi Prabhu Ki Krpa Apaar)
पूज्य राजन जी द्वारा श्री राम कथा में गाया हुआ भजन- बरस रहि प्रभु की कृपा अपार, एक बहुत ही अद्भुत भजन है। यह भजन प्रातः स्मरणीय परम पूज्य साकेत वासी श्री गीतानंद जी महाराज " भिक्षु जी " जी की रचना है । अक्टूबर 2018 में रायपुर की कथा में पूज्य राजन जी ने इसे गाया है। जीवन में जब सबको एक समान नजर से देखने की आदत पड़ जाती है, तो उद्धार का द्वार खुद खुल जाता है। प्रभु हर जगह समभाव से विराजमान हैं, अपार कृपा बरसाते रहते हैं। कान सत्संग सुनने को मिले, नयन दर्शन पाने को, हाथ सेवा करने को तत्पर हों, तो मानव जन्म सार्थक हो उठता है। जीभ हरि नाम जपे, बुद्धि श्रवण-मनन में लगे, नित्य अध्ययन से भवसागर पार हो जाता है। ये सब इश्वर का आशीर्वाद है जो हमें सही राह दिखाता है।
धन-यौवन का मान न छोड़ें, राम नाम सुमिरन से जीवन भर लें, हर में हरि निहारें। सत्संग, सेवा, सुमिरन से श्रद्धा-भक्ति जगाएं, राम कथा की गंगा में नहाएं तो पाप धुल जाते हैं। भिक्षु की पुकार सुनें, जीवन सफल बना लें। आप सभी पर इश्वर की कृपा बनी रहे। जय श्री राम जी की।
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