मैं तो वही रे संतों रो निज दास भजन
मैं तो वही रे संतों रो निज दास भजन
मैं तो वही रे संतों रो निज दास,
मैं तो वही रे, संतों रो निज दास,
जिन्हाने मन मार लिया,
मार लिया, मन मार लिया,
जिन्होंने मन मार लिया।
मन मारया तन बस किया,
किया भरम सब दूर,
दयालु, किया भरम दूर,
बाहर तो कछु दरसे नाहीं,
भीतर चमके ज्यारे नूर,
जिन्होंने मन मार लिया,
मैं तो वही रे, संतों रो निज दास,
जिन्हाने मन मार लिया,
मार लिया, मन मार लिया,
जिन्होंने मन मार लिया।
आपा मार जगत में बैठ्या,
नहीं किसी से काम,
दयालु, नहीं किसी से काम,
वामे तो कछु अंतर नहीं,
संत कहवो ने राम,
जिन्होंने मन मार लिया,
मैं तो वही रे, संतों रो निज दास,
जिन्हाने मन मार लिया,
मार लिया, मन मार लिया,
जिन्होंने मन मार लिया।
काम क्रोध मद लोभ त्याग ने,
तजि जगत री आस,
दयालु, तजि जगत री आस,
बलिहारी उन संतो ने भाई,
प्रकट करियो प्रकाश,
जिन्होंने मन मार लिया,
मैं तो वही रे, संतों रो निज दास,
जिन्हाने मन मार लिया,
मार लिया, मन मार लिया,
जिन्होंने मन मार लिया।
नरसिंह जी के सद्गुरु स्वामी,
दियो अमी रस पाय,
दयालु, दियो अमी रस पाय,
एक बून्द सायर में मिलगी,
काई रे करेगा जमराज,
जिन्होंने मन मार लिया,
मैं तो वही रे, संतों रो निज दास,
जिन्हाने मन मार लिया,
मार लिया, मन मार लिया,
जिन्होंने मन मार लिया।
प्याला पिया प्रेम का रे,
छोड़ा जगत का मोह,
राम रे, छोड़ा जगत का मोह,
हमको सतगुरु ऐसा मिल गया,
सहज मुक्ति होय,
जिन्होंने मन मार लिया,
मैं तो वही रे, संतों रो निज दास,
जिन्हाने मन मार लिया,
मार लिया, मन मार लिया,
जिन्होंने मन मार लिया।
:: मूल भजन Original Path::
मैं तो हूँ संतन को दास, जिन्होंने मन मार लिया ॥ टेर॥
मन मार या तन बस किया रे, हुआ भरम सब दूर ।
बाहिर तो कछु दीखत नाहीं भीतर चमके नूर ॥१॥
काम क्रोध मद लोभ मारके, मिटी जगत की आस ।
बलिहारी उन संत की रे, प्रकट किया प्रकास ॥२॥
आपो त्याग जगत में बैठे, नहीं किसीसे काम ।
उनमें तो कछु अन्तर नाँहीं, संत कहौ चाहे राम ॥३॥
नरसीजी के सतगुरु स्वामी, दिया अमीरस पाय ।
एक बूँद सागर में मिल गई, क्या तो करेगा जमराज ॥४॥
मैं तो वही रे, संतों रो निज दास,
जिन्हाने मन मार लिया,
मार लिया, मन मार लिया,
जिन्होंने मन मार लिया।
मन मारया तन बस किया,
किया भरम सब दूर,
दयालु, किया भरम दूर,
बाहर तो कछु दरसे नाहीं,
भीतर चमके ज्यारे नूर,
जिन्होंने मन मार लिया,
मैं तो वही रे, संतों रो निज दास,
जिन्हाने मन मार लिया,
मार लिया, मन मार लिया,
जिन्होंने मन मार लिया।
आपा मार जगत में बैठ्या,
नहीं किसी से काम,
दयालु, नहीं किसी से काम,
वामे तो कछु अंतर नहीं,
संत कहवो ने राम,
जिन्होंने मन मार लिया,
मैं तो वही रे, संतों रो निज दास,
जिन्हाने मन मार लिया,
मार लिया, मन मार लिया,
जिन्होंने मन मार लिया।
काम क्रोध मद लोभ त्याग ने,
तजि जगत री आस,
दयालु, तजि जगत री आस,
बलिहारी उन संतो ने भाई,
प्रकट करियो प्रकाश,
जिन्होंने मन मार लिया,
मैं तो वही रे, संतों रो निज दास,
जिन्हाने मन मार लिया,
मार लिया, मन मार लिया,
जिन्होंने मन मार लिया।
नरसिंह जी के सद्गुरु स्वामी,
दियो अमी रस पाय,
दयालु, दियो अमी रस पाय,
एक बून्द सायर में मिलगी,
काई रे करेगा जमराज,
जिन्होंने मन मार लिया,
मैं तो वही रे, संतों रो निज दास,
जिन्हाने मन मार लिया,
मार लिया, मन मार लिया,
जिन्होंने मन मार लिया।
प्याला पिया प्रेम का रे,
छोड़ा जगत का मोह,
राम रे, छोड़ा जगत का मोह,
हमको सतगुरु ऐसा मिल गया,
सहज मुक्ति होय,
जिन्होंने मन मार लिया,
मैं तो वही रे, संतों रो निज दास,
जिन्हाने मन मार लिया,
मार लिया, मन मार लिया,
जिन्होंने मन मार लिया।
:: मूल भजन Original Path::
मैं तो हूँ संतन को दास, जिन्होंने मन मार लिया ॥ टेर॥
मन मार या तन बस किया रे, हुआ भरम सब दूर ।
बाहिर तो कछु दीखत नाहीं भीतर चमके नूर ॥१॥
काम क्रोध मद लोभ मारके, मिटी जगत की आस ।
बलिहारी उन संत की रे, प्रकट किया प्रकास ॥२॥
आपो त्याग जगत में बैठे, नहीं किसीसे काम ।
उनमें तो कछु अन्तर नाँहीं, संत कहौ चाहे राम ॥३॥
नरसीजी के सतगुरु स्वामी, दिया अमीरस पाय ।
एक बूँद सागर में मिल गई, क्या तो करेगा जमराज ॥४॥
में तो वही रे संता रो निज दास ,जिन्होंने मन मार लिया....|| सद्गुरु कबीर Saheb भजन
Main To Vahi Re, Santon Ro Nij Daas,
Jinhaane Man Maar Liya,
Maar Liya, Man Maar Liya,
Jinhonne Man Maar Liya.
Man Maaraya Tan Bas Kiya,
Kiya Bharam Sab Dur,
Dayaalu, Kiya Bharam Dur,
Baahar To Kachhu Darase Naahin,
Bhitar Chamake Jyaare Nur,
Jinhonne Man Maar Liya,
Main To Vahi Re, Santon Ro Nij Daas,
Jinhaane Man Maar Liya,
Maar Liya, Man Maar Liya,
Jinhonne Man Maar Liya.
Jinhaane Man Maar Liya,
Maar Liya, Man Maar Liya,
Jinhonne Man Maar Liya.
Man Maaraya Tan Bas Kiya,
Kiya Bharam Sab Dur,
Dayaalu, Kiya Bharam Dur,
Baahar To Kachhu Darase Naahin,
Bhitar Chamake Jyaare Nur,
Jinhonne Man Maar Liya,
Main To Vahi Re, Santon Ro Nij Daas,
Jinhaane Man Maar Liya,
Maar Liya, Man Maar Liya,
Jinhonne Man Maar Liya.
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