रूप धरे विकराल ओ मैया रूप धरे विकराल

रूप धरे विकराल ओ मैया रूप धरे विकराल भजन

 रूप धरे विकराल ओ मैया,
रूप धरें विकराल,
जिनके आगे दानव भागे,
आ जाए भूचाल,
रूप धरें विकराल ओ मईया,
रूप बड़ा विकराल।।

खड़ग त्रिशूल को लेकर,
मन में क्रोध भयंकर,
समर में ऐसी गरजे,
दानव काँपे थर-थर,
पाप मिटाए जगत बचाए,
दुनिया हुई खुशहाल,
रूप धरें विकराल ओ मैया,
रूप बड़ा विकराल।।

रूप भयानक काला,
पहने मुंड की माला,
छोड़े मैया ज्वाला,
पिये लहू का प्याला,
शक्तिशाली ममता वाली,
संकट देती टाल,
रूप धरें विकराल ओ मैया,
रूप बड़ा विकराल।।

दानव दल को मिटाने,
चली है मैया ठाने,
लगी कटार चलाने,
दुष्ट लगे घबराने,
करो ‘निरंजन’ माँ का वंदन,
मैया बड़ी दयाल,
रूप धरें विकराल ओ मैया,
रूप बड़ा विकराल।।

रूप धरे विकराल ओ मैया,
रूप धरें विकराल,
जिनके आगे दानव भागे,
आ जाए भूचाल,
रूप धरें विकराल ओ मैया,
रूप बड़ा विकराल।।


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