अब क्या होगा मेरा राम बीच बुढ़ापे में

अब क्या होगा मेरा राम बीच बुढ़ापे में लिरिक्स

अब क्या होगा मेरा राम,
बीच बुढ़ापे में,
अब क्या होगा मेरा राम,
बीच बुढ़ापे में,


संगमरमर का महल बनाया,
फुलर पंखा उसमे लगाया,
बहु बेटे को उसमें बिठाया,
हो रही मेरी खटिया बाहर,
बीच बुढ़ापे में,
अब क्या होगा मेरा राम,
बीच बुढ़ापे में।

जैसा मिलता खाना पड़ता,
जैसा मिलता खाना पड़ता,
रोटी ऊपर अचार,
बीच बुढ़ापे में,
अब क्या होगा मेरा राम,
बीच बुढ़ापे में।

बेटा नहीं सुणता बहु नहीं सुणती,
बेटा नहीं सुणता बहु नहीं सुणती,
करते हैं दोनों अपने मन की,
बेटा होया ग़ुलाम,
बीच बुढ़ापे में,
अब क्या होगा मेरा राम,
बीच बुढ़ापे में।

हाड भी सुख्या, माँस भी सूख्या,
अब हम तो होये बेकार,
बीच बुढ़ापे में,
अब क्या होगा मेरा राम,
बीच बुढ़ापे में।

जैसी करणी वैसी भरणी,
अब तो रामजी करेंगे बेडा पार,
बीच बुढ़ापे में,
अब क्या होगा मेरा राम,
बीच बुढ़ापे में।

अब क्या होगा मेरा राम बीच बुढापे में (गायक नरेंद्र कौशिक) - Ram Bhajan || Ab Kya Hoga Mera Ram

Ab Kya Hoga Mera Raam,
Bich Budhaape Mein,
Ab Kya Hoga Mera Raam,
Bich Budhaape Mein,

Sangamaramar Ka Mahal Banaaya,
Phular Pankha Usame Lagaaya,
Bahu Bete Ko Usamen Bithaaya,
Ho Rahi Meri Khatiya Baahar,
Bich Budhaape Mein,
Ab Kya Hoga Mera Raam,
Bich Budhaape Mein.

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