प्रीत नंद नंदन सो कीजे संपत्ति विपत्ति परे भजन

प्रीत नंद नंदन सो कीजे संपत्ति विपत्ति परे भजन

प्रीत नंद नंदन सो कीजे।
संपत्ति विपत्ति परे प्रतिपाले कृपा करे सो जीजे॥
परम उदार चतुर चिंतामणि सेवा सुमरन माने।
हस्त कमल की छाया राखत अंतर घट की जाने॥
वेद पुरान श्रीभागवत भाखत कियो भक्तन मन भायो।
परमानंद इंद्र सो वैभव विप्र सुदामा पायो॥ 

हमें नंदनंदन (श्रीकृष्ण) से प्रेम करना चाहिए, क्योंकि वे संपत्ति और विपत्ति दोनों में हमारी रक्षा करते हैं और कृपा करते हैं। वे परम उदार, चतुर, और चिंतामणि के समान हैं, जिनकी सेवा और स्मरण करना चाहिए। उनके हस्त कमल की छाया हमें सुरक्षित रखती है, और वे हमारे अंतर की बातों को जानते हैं। वेद, पुराण, और श्रीभागवत में उनकी महिमा का वर्णन है, जो भक्तों के मन को भाती है। परमानंद कहते हैं कि इंद्र के वैभव से भी बढ़कर संपत्ति ब्राह्मण सुदामा को श्रीकृष्ण की कृपा से प्राप्त हुई।


प्रीति नंदनंदन सौं कीजे - श्री परमानन्द दास जी पद | Shree Hita Ambrish Ji
सिंगर : Shree Hita Ambrish Ji

जिंदगी में चाहे सुख आए या दुख, जब नंदनंदन के साथ प्रेम का रिश्ता गहरा हो जाता है तो हर हाल में मन को सहारा मिलता है। वे संपत्ति में भी साथ निभाते हैं और विपत्ति में भी हाथ थाम लेते हैं। उनकी कृपा ऐसी है कि छोटी-छोटी बातों में भी बड़ा बल महसूस होता है। सेवा और सुमिरन से वे इतने प्रसन्न हो जाते हैं कि उनके हस्त कमल की छाया हमेशा सिर पर बनी रहती है। अंदर की हर बात वे जान लेते हैं, इसलिए मन कभी अकेला नहीं पड़ता।
वेद-पुराण और श्रीमद्भागवत में उनकी लीला बार-बार गाई गई है, क्योंकि भक्तों का मन उसी में रम जाता है। सुदामा जैसे गरीब ब्राह्मण को उन्होंने इंद्र के वैभव से भी बढ़कर धन दिया। इतनी उदारता और चतुराई किसी और में नहीं दिखती। परमानंद की तरह जब कोई उनके नाम में डूब जाता है तो सारी चिंताएं दूर हो जाती हैं और जीवन में सच्चा आनंद आ जाता है।
जब भी मन में कोई कमी लगे या जीवन बोझिल हो जाए, बस नंदनंदन को याद कर लो। वे सब कुछ संवार देते हैं और दिल को भरपूर प्यार से भर देते हैं।

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