मेरे शंकर सा देव नहीं दूजा रे शिव भजन
मेरे शंकर सा देव नहीं दूजा रे शिव भजन
शम्भू महादेव,महादेव, महादेव, महादेव, ओ महादेव,
महादेव, महादेव, महादेव, ओ महादेव,
ॐ त्र्यम्बकं यजामहे, सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम्,
उर्वारुकमिव बन्धनान, मृत्युर्मुक्षीय मामृतात्।
मेरे शंकर सा देव नहीं दूजा रे,
सबसे पहले तुम्हारी पूजा रे,
मेरे शंकर सा देव नहीं दूजा रे,
सबसे पहले तुम्हारी पूजा रे,
महादेव, महादेव, महादेव, ओ महादेव,
महादेव, महादेव, महादेव, ओ महादेव।
मस्तक पर चंदा जटा में गंगा,
भूतों की टोली सवारी है नंदा,
बाघम्बर धारी शिव त्रिपुरारी,
महाकाल है जग के रचईयां,
महादेव, महादेव, महादेव, ओ महादेव,
महादेव, महादेव, महादेव, ओ महादेव।
सर्पों की माला गले में साजै,
डम डम डमरू शिव का बाजै,
तुम रक्षक तेरे खेल निराले,
शिव कैलाशी है मतवाले,
महादेव, महादेव, महादेव, ओ महादेव,
महादेव, महादेव, महादेव, ओ महादेव।
कालों के काल महाकाल राजा,
उज्जैन नगरी है धाम तुम्हारा,
कर ले सुमिरन ‘लक्की’ लगन से,
ऐसा जीवन ना आए दोबारा,
महादेव, महादेव, महादेव, ओ महादेव,
महादेव, महादेव, महादेव, ओ महादेव।
मेरे शंकर सा देव नहीं दूजा रे,
सबसे पहले तुम्हारी पूजा रे,
मेरे शंकर सा देव नहीं दूजा रे,
सबसे पहले तुम्हारी पूजा रे,
महादेव, महादेव, महादेव, ओ महादेव,
महादेव, महादेव, महादेव, ओ महादेव।
भजन श्रेणी : शिव भजन
मेरे शंकर सा देव नही दूजा रे ||#Mere Shankar Sa Dev Nhi Duja Re||#Laxminarayan kumawat
शिव के दर्शन से मन भर जाता है। मस्तक पर चंद्रमा चमकता है, जटाओं में गंगा लहराती रहती है, जैसे कोई अनंत यात्रा का साथी। नंदी पर सवार भूतों की टोली संग घूमते हैं, बाघम्बर लपेटे त्रिपुरारी बनकर जग को रचते हैं। डमरू की थाप पर सर्पों की माला झूमती है, कालों के काल महाकाल उज्जैन के धाम से सबकी रक्षा करते हैं। जीवन की हर उलझन में उनकी सादगी याद आती है, जो कहती है—डरो मत, सब संभाल लेंगे।
महादेव सबसे पहले पूजे जाते हैं, क्योंकि वे ही अमरत्व का मंत्र देते हैं। त्र्यम्बक मंत्र जपते हुए बंधनों से मुक्ति मिलती है, जैसे उर्वारुक फल टूटकर आजाद हो जाता। उनके खेल निराले हैं, रक्षक बनकर विपत्तियां हर लेते हैं। हमें सिखाते हैं कि सच्ची भक्ति तो यही है—नाम का सुमिरन, लगन से जप। जब दिल उदास हो, बस पुकार लो महादेव, ओ महादेव... जीवन फिर खिल उठेगा, जैसे कैलाश की बर्फ पिघलकर गंगा बन बहती है। आओ, आज से ही शुरू करें ये जाप, दिल को शांति मिलेगी, जीना सार्थक हो जाएगा।
महादेव सबसे पहले पूजे जाते हैं, क्योंकि वे ही अमरत्व का मंत्र देते हैं। त्र्यम्बक मंत्र जपते हुए बंधनों से मुक्ति मिलती है, जैसे उर्वारुक फल टूटकर आजाद हो जाता। उनके खेल निराले हैं, रक्षक बनकर विपत्तियां हर लेते हैं। हमें सिखाते हैं कि सच्ची भक्ति तो यही है—नाम का सुमिरन, लगन से जप। जब दिल उदास हो, बस पुकार लो महादेव, ओ महादेव... जीवन फिर खिल उठेगा, जैसे कैलाश की बर्फ पिघलकर गंगा बन बहती है। आओ, आज से ही शुरू करें ये जाप, दिल को शांति मिलेगी, जीना सार्थक हो जाएगा।
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