अवसर तेरा पल पल में जावे सुता ने नींद क्यूं आवे

अवसर तेरा पल पल में जावे सुता ने नींद क्यूं आवे

कबीर इन संसार में,
धारा देखी दोय,
धन चाहिए तो धर्म करो,
मुक्ति नाम से होय।।

अवसर तेरा पल-पल में जावे,
सुता ने नींद क्यों आवे,
सिरहाणे जम खड़ा बेरी,
भजन बिना कौन गति तेरी।।

बड़े भए रावण से राजा,
जिन रो घर बाजते बाजा,
जीते सब लोक ते डंका,
सो खाली कर गए लंका,
अवसर तेरा पल-पल में जावे,
सुता ने नींद क्यों आवे।।

पड़े ज्यूँ पानी की पोटा,
भरोसो देह को खोटा,
अंत में जंगल में वासा,
झूठी सब जगत की आशा,
अवसर तेरा पल-पल में जावे,
सुता ने नींद क्यों आवे।।

कंचन सी देह है काच्ची,
जले वाकी अग्नि सी छाती,
मेरे तो साइब से मिलना,
जहाँ नहीं काल का चलना,
अवसर तेरा पल-पल में जावे,
सुता ने नींद क्यों आवे।।

सुरपति को काल ने खाया,
खोटी ये जगत की माया,
ताहीं से विलंब न कीजे,
कबीरा राम रस पीजे,
अवसर तेरा पल-पल में जावे,
सुता ने नींद क्यों आवे।।

अवसर तेरा पल-पल में जावे,
सुता ने नींद क्यों आवे,
सिरहाणे जम खड़ा बेरी,
भजन बिना कौन गति तेरी।।


Sunita Swami || अवसर तेरा पल पल में जावे || चेतावनी भजन ||Avsar Tera pal Pal me jave|| सुनीता स्वामी

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Saroj Jangir Author Author - Saroj Jangir

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