दरसन दीजो खोल किवार शब्द अर्थ सहित

दरसन दीजो खोल किवार शब्द अर्थ सहित

दरसन दीजै, दरसन दीजो,
दरसन दीजे, खोल किवार,
तुझ बिन सूरत करे को मेरी,
तुझ बिन सूरत करे को मेरी,
दरसन दीजे, खोल किवार,
दरमादे ठाढे दरबार,
दरसन दीजो खोल किवार,
दरसन दीजो खोल किवार।

तुम धन धनी उदार त्यागी,
श्रवणन सुनियत सुजस तुम्हार,
तुम धन धनी उदार त्यागी,
श्रवणन सुनियत सुजस तुम्हार,
माँगों काही रंक सब देखूँ,
जाचक मंगे दान,
दे प्यारिया,
देवण हार दातार,
मैं नित चितारिया,
निखुट ना जाए मूल,
अतुल भण्डारिया,
नानक शब्द अपार,
तिन सब किछ सारिया,
माँगों काही रंक सब देखूँ,
तुम ही ते मेरौ निस्तार,
दरसन दीजो खोल किवार,
दरसन दीजो खोल किवार।

जैदेऔ नामा बिप सुदामा,
तिन कौ कृपा भई है अपार,
जैदेऔ नामा बिप सुदामा,
तिन कौ कृपा भई है अपार,
कहे कबीर तुम समर्थ दाते,
चार पदार्थ देत ना बार,
दरसन दीजो खोल किवार,
दरसन दीजो खोल किवार।

ਦਰਸਨੁ ਦੀਜੈ ਖੋਲਿ ਕਿਵਾਰ॥
ਤੁਝ ਬਿਨੁ ਸੁਰਤਿ ਕਰੈ ਕੋ ਮੇਰੀ,
ਦਰਸਨੁ ਦੀਜੈ ਖੋਲ਼ੇ ਕਿਵਾਰ॥
ਦਰਮਾਦੇ ਠਾਢੇ ਦਰਬਾਰਿ ॥
ਤੁਮ ਧਨ ਧਨੀ ਉਦਾਰ ਤਿਆਗੀ,
ਸ੍ਰਵਨ ਸੁਨੀਅਹੁ ਸੁਜਸੁ ਤੁਮਾਰ ॥
ਮਾਗਉ ਕਾਹਿ ਰੰਕ ਸਭ ਦੇਖਉ,
ਤੁਮ ਹੀ ਤੇ ਮੇਰੋ ਨਿਸਤਾਰੁ ॥
ਜੈਦੇਉ ਨਾਮਾ ਬਿਪ ਸੁਦਾਮਾ,
ਤਿਨ ਕਉ ਕ੍ਰਿਪਾ ਭਈ ਹੈ ਅਪਾਰ ॥
ਕਹਿ ਕਬੀਰ ਤੁਮ ਸਮਰੱਥ ਦਾਤੇ,
ਚਾਰਿ ਪਦਾਰਥ ਦੇਤ ਨ ਬਾਰ ॥


भजन श्रेणी : पंजाबी भजन /शबद (Punjabi Bhajan)


ਦਰਸਨੁ ਦੀਜੈ - Lyrical | Darshan Deeje | Asees Kaur | Shabad Gurbani | Punjabi Devotional
 
दरसन दीजै, दरसन दीजो,
दरसन दीजे, खोल किवार,

हिंदी मीनिंग : हे ईश्वर आप अपने द्वार को खोलकर मुझे दर्शन दो (किवाड़ खोलकर मुझे दर्शन दो, मैं आपके द्वार पर खड़ा हूँ )
तुझ बिन सूरत करे को मेरी : आपके बगैर कौन मेरी सुध लेगा ? आपके बिन कौन मुझे संभालेगा ?
दरसन दीजे, खोल किवार : हे ईश्वर किवाड़ खोलकर मुझे दर्शन दो।
दरमादे ठाढे दरबार : हम बड़े ही विनय के साथ आपके दरबार में खड़े हैं।
तुम धन धनी उदार त्यागी : आप धनी के भी धनी हैं, आप सर्वोच्च धनी हैं। आप ही उदार और त्यागी हैं। आप भौतिक जगत से दूर हैं।
श्रवणन सुनियत सुजस तुम्हार : हम कानों से आपके यश, कीर्ति का सुजस सुनते हैं।
माँगों काही रंक सब देखूँ : मैं यहाँ किससे माँगूँ, मैं देखता हूँ की इस जगत में तो सभी आपसे ही मांगने वाले हैं।

जाचक मंगे दान : मैं दरिद्र व्यक्ति आपसे दान मांगता हूँ।
दे प्यारिया : हे मेरे प्यारे ईश्वर मुझे भक्ति और शक्ति का दान दो।
देवण हार दातार : आप ही देने वाले हैं आप ही दानी (दातार ) हैं।
मैं नित चितारिया : मैं रोज ही आपको देखता हूँ।
जैदेऔ नामा बिप सुदामा : आपने जयदेव और नाम देव को दिया, और ब्राह्मण सुदामा को दिया (भक्ति का प्रसाद )
तिन कौ कृपा भई है अपार : उन पर आपकी अपार कृपा हुई है।
कहे कबीर तुम समर्थ दाते : कबीर साहेब कहते हैं की आप ही दाता और देने में समर्थ हैं।
चार पदार्थ देत ना बार : आप चारों प्रदार्थों को देने में समय नहीं लगाते हो।
ਦਰਮਾਦੇ ਠਾਢੇ ਦਰਬਾਰਿ ॥

Dharamaadhae Thaadtae Dharabaar ||
ਤੁਝ ਬਿਨੁ ਸੁਰਤਿ ਕਰੈ ਕੋ ਮੇਰੀ ਦਰਸਨੁ ਦੀਜੈ ਖੋਲ੍ਹ੍ਹਿ ਕਿਵਾਰ ॥੧॥ ਰਹਾਉ ॥
Thujh Bin Surath Karai Ko Maeree Dharasan Dheejai Kholih Kivaar ||1|| Rehaao ||
ਤੁਮ ਧਨ ਧਨੀ ਉਦਾਰ ਤਿਆਗੀ ਸ੍ਰਵਨਨ੍ਹ੍ਹ ਸੁਨੀਅਤੁ ਸੁਜਸੁ ਤੁਮ੍ਹ੍ਹਾਰ ॥
Thum Dhhan Dhhanee Oudhaar Thiaagee Sravananh Suneeath Sujas Thumhaar ||
ਮਾਗਉ ਕਾਹਿ ਰੰਕ ਸਭ ਦੇਖਉ ਤੁਮ੍ਹ੍ਹ ਹੀ ਤੇ ਮੇਰੋ ਨਿਸਤਾਰੁ ॥੧॥
Maago Kaahi Rank Sabh Dhaekho Thumh Hee Thae Maero Nisathaar ||1||
ਜੈਦੇਉ ਨਾਮਾ ਬਿਪ ਸੁਦਾਮਾ ਤਿਨ ਕਉ ਕ੍ਰਿਪਾ ਭਈ ਹੈ ਅਪਾਰ ॥
Jaidhaeo Naamaa Bip Sudhaamaa Thin Ko Kirapaa Bhee Hai Apaar ||
ਕਹਿ ਕਬੀਰ ਤੁਮ ਸੰਮ੍ਰਥ ਦਾਤੇ ਚਾਰਿ ਪਦਾਰਥ ਦੇਤ ਨ ਬਾਰ ॥੨॥੭॥
Kehi Kabeer Thum Sanmrathh Dhaathae Chaar Padhaarathh Dhaeth N Baar ||2||7||

दरसन दीजै, दरसन दीजो,
दरसन दीजे, खोल किवार,
तुझ बिन सूरत करे को मेरी,
तुझ बिन सूरत करे को मेरी,
दरसन दीजे, खोल किवार,
दरमादे ठाढे दरबार,
दरसन दीजो खोल किवार,
दरसन दीजो खोल किवार।

तुम धन धनी उदार त्यागी,
श्रवणन सुनियत सुजस तुम्हार,
तुम धन धनी उदार त्यागी,
श्रवणन सुनियत सुजस तुम्हार,
माँगों काही रंक सब देखूँ,
जाचक मंगे दान,
दे प्यारिया,
देवण हार दातार,
मैं नित चितारिया,
निखुट ना जाए मूल,
अतुल भण्डारिया,
नानक शब्द अपार,
तिन सब किछ सारिया,
माँगों काही रंक सब देखूँ,
तुम ही ते मेरौ निस्तार,
दरसन दीजो खोल किवार,
दरसन दीजो खोल किवार।

जैदेऔ नामा बिप सुदामा,
तिन कौ कृपा भई है अपार,
जैदेऔ नामा बिप सुदामा,
तिन कौ कृपा भई है अपार,
कहे कबीर तुम समर्थ दाते,
चार पदार्थ देत ना बार,
दरसन दीजो खोल किवार,
दरसन दीजो खोल किवार।

ਦਰਸਨੁ ਦੀਜੈ ਖੋਲਿ ਕਿਵਾਰ॥
ਤੁਝ ਬਿਨੁ ਸੁਰਤਿ ਕਰੈ ਕੋ ਮੇਰੀ,
ਦਰਸਨੁ ਦੀਜੈ ਖੋਲ਼ੇ ਕਿਵਾਰ॥
ਦਰਮਾਦੇ ਠਾਢੇ ਦਰਬਾਰਿ ॥
ਤੁਮ ਧਨ ਧਨੀ ਉਦਾਰ ਤਿਆਗੀ,
ਸ੍ਰਵਨ ਸੁਨੀਅਹੁ ਸੁਜਸੁ ਤੁਮਾਰ ॥
ਮਾਗਉ ਕਾਹਿ ਰੰਕ ਸਭ ਦੇਖਉ,
ਤੁਮ ਹੀ ਤੇ ਮੇਰੋ ਨਿਸਤਾਰੁ ॥
ਜੈਦੇਉ ਨਾਮਾ ਬਿਪ ਸੁਦਾਮਾ,
ਤਿਨ ਕਉ ਕ੍ਰਿਪਾ ਭਈ ਹੈ ਅਪਾਰ ॥
ਕਹਿ ਕਬੀਰ ਤੁਮ ਸਮਰੱਥ ਦਾਤੇ,
ਚਾਰਿ ਪਦਾਰਥ ਦੇਤ ਨ ਬਾਰ ॥

Song : Darshan deeje
Singer : Asees Kaur
Music : Amjad Nadeem
Composed by : Asees Kaur
Lyrics : Traditional

गुरबाणी में भक्त अपनी व्याकुलता और विनम्र प्रार्थना को प्रभु के चरणों में अर्पित करता है। यह भक्त की पुकार है कि प्रभु अपने द्वार खोलकर उसे दर्शन दें, क्योंकि उनके बिना उसका कोई सहारा नहीं। यह शब्द भक्ति, समर्पण और प्रभु की उदारता की महिमा को उजागर करता है, जो सभी के लिए मुक्ति का मार्ग प्रशस्त करता है।

सच्चा भक्त प्रभु के दरबार में विनम्र भाव से खड़ा होकर केवल उनके दर्शन की याचना करता है, क्योंकि उनके बिना जीवन सूना है। प्रभु धन के धनी, उदार और त्यागी हैं, जिनका यश कानों से सुनकर भक्त का हृदय और गहराई से उनके प्रति समर्पित हो जाता है। भक्त यह मानता है कि इस संसार में सभी रंक हैं, और केवल प्रभु ही दाता हैं, जो भक्ति और शक्ति का दान देने में समर्थ हैं। प्रभु का नाम ही वह अनमोल रत्न है, जो भक्त को नित्य चिंतन में डुबोए रखता है और उसे संसार के बंधनों से मुक्त करता है। यह शब्द हमें प्रभु की कृपा की अपारता की याद दिलाता है, जो भक्तों को चारों पुरुषार्थ—धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष—प्रदान करती है।

जैसा कि जयदेव, नामदेव और सुदामा जैसे भक्तों पर प्रभु की अपार कृपा बरसी, वैसे ही प्रत्येक भक्त जो सच्चे मन से प्रभु का स्मरण करता है, वह उनकी कृपा का पात्र बनता है। कबीर जी कहते हैं कि प्रभु समर्थ दाता हैं, जो बिना विलंब के भक्तों की हर पुकार सुनते हैं और उनके जीवन को अर्थपूर्ण बनाते हैं। यह शब्द हमें प्रेरित करता है कि हम अपने हृदय के किवाड़ खोलें और प्रभु के नाम में लीन होकर उनके दर्शन की याचना करें, क्योंकि यही वह मार्ग है जो हमें संसार के दुखों से मुक्ति दिलाकर प्रभु के चरणों में स्थान देता है।
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