अंजनी का लाला बड़ा मतवाला भजन

अंजनी का लाला बड़ा मतवाला भजन

पवन तनय संकट हरण.
मंगलमूर्ति रूप,
राम लखन सीता सहित,
हदये बसहु सुर भूप।
अंजनी का लाला,
बड़ा मतवाला,
हवा में उड़ता जाए रै,
मेरा राम दुलारा।

इक दिन देखा मैंने अवधपुरी में,
अवधपुरी में रामा अवधपुरी में,
राम की लगन लगाए रै,
मेरा राम दुलारा,
हवा में उड़ता जाए रै,
मेरा राम दुलारा।

एक दिन देखा मैंने सुमिरु पर्वत पै,
सुमिरु पर्वत पे रामा सुमिरु पर्वत पै,
संजीवनी बूँटी लाए रे,
मेरा दुलारा,
हवा में उड़ता जाए रै,
मेरा राम दुलारा।

एक दिन देखा मैंने लंका पुरी में,
लंका पुरी में रामा लंका पुरी में,
सोने की लंका जलाए रै,
मेरा राम दुलारा,
हवा में उड़ता जाए रै,
मेरा राम दुलारा।

एक दिन देखा आकाशपुरी में,
आकाशपुरी में आकाशपुरी में,
सूरज को निगल जो डाले रै,
मेरा राम दुलारा,
हवा में उड़ता जाए रै,
मेरा राम दुलारा।

अंजनी का लाला,
बड़ा मतवाला,
हवा में उड़ता जाए रै,
मेरा राम दुलारा।

भजन श्रेणी : हनुमान भजन (Hanuman Bhajan)

हवा में उड़ता जाए रे मेरा राम दुलारा || हनुमान भजन || Hawa Mein Udta Jaye Re Mera Ram Dulara

Pavan Tanay Sankat Haran.
Mangalamurti Rup,
Raam Lakhan Sita Sahit,
Hadaye Basahu Sur Bhup.
Anjani Ka Laala,
Bada Matavaala,
Hava Mein Udata Jae Rai,
Mera Raam Dulaara. 


Title - Hawa Me Udhta Jaye Re Mera Raam Doolara
Artist - Pallavi Narang
Singer - Sheela Kalson
Lyrics - Traditional
Music - Pardeep Panchal
Editing - Utsav
Label - Geet Mithas
Copyright - Fine Digital Media 

जब दिल मानता है कि जीत नहीं, बल्कि हार ही सच्ची जीत है, तो वह खुद ही मँझधार माँगने लगता है। किनारे की सुरक्षित जगह के बजाय वह यही चाहता है कि भगवान उसे समुद्री तूफ़ान के बीच ले जाएँ, जहाँ डगर दिखाई न देती हो, पर वहीं उनका हाथ उसके हाथ में टिका रहे। ऐसा लगता है मानो जीवन की सबसे बड़ी कामयाबी नाव को सुरक्षित घाट पर छोड़ना नहीं, बल्कि उसे हर लहर के साथ मिलकर आगे बढ़ना है।

तूफ़ान आता है तो सेवक का मन घबरा जाता है, लेकिन फिर भी वह उसी मुश्किल में छिपा उद्धार देखता है। मँझधार में घिरा बच्चा अपने पिता के हाथों में हाथ लेकर जमीन तक पहुँचता है, इसी तरह भगवान वही काम करते हैं जो हारी हुई बाज़ी को फिर से जीत की ओर मोड़ देते हैं। जब नैया किनारे लग जाती है और वहाँ ही रह जाती है, तो वह सिर्फ़ सुरक्षा की कहानी बन जाती है, लेकिन भगवान से तो यही मांग है कि उसे ऐसी डगर दिखाएँ जो न किनारे पर ठहरे, न अकेले तैरने की हो।

अब यह भाव उठता है कि श्याम वही मार्ग दिखाएँ जहाँ मिल‑जुलकर दोनों एक साथ मँझधार की लहरों को पार करें, हाथ में हाथ लिए बिना किनारे की चिंता, बिना नैया की बेड़ियाँ। जब दिल यह मान लेता है कि डूबना भी उनके साथ सुकून है, तब मँझधार खुद‑से सुरक्षा बन जाती है। 

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