म्हारो मनड़ो हर लीनो जी म्हारा मदन गोपाल
म्हारो मनड़ो हर लीनो जी म्हारा मदन गोपाल
सांवरिया थारा घुँघर वाला बाल,
म्हारो मनड़ो हर लीनो जी,
म्हारा मदन गोपाल।।
सांवरिया थारा चंचल नैन विशाल,
म्हने भूल कदे ना जाजो जी,
म्हारा मदन गोपाल।।
सांवरिया थारे पगड़ी को रंग अनार,
यो तीखो तीर चलावे जी,
म्हारा मदन गोपाल।।
सांवरिया थारे राधा रे रुक्मिण लार,
या जोड़ी प्यारी लागे रे,
म्हारा मदन गोपाल।।
सांवरिया थारे हाथां रे मुरली धार,
थे मुरलीधर कहलाओ जी,
म्हारा मदन गोपाल।।
सांवरिया थे तो भगता रा सिरदार,
म्हारी नैया पार लगाजो जी,
म्हारा मदन गोपाल।।
सांवरिया थारा घुँघर वाला बाल,
म्हारो मनड़ो हर लीनो जी,
म्हारा मदन गोपाल।।
म्हारो मनड़ो हर लीनो जी,
म्हारा मदन गोपाल।।
सांवरिया थारा चंचल नैन विशाल,
म्हने भूल कदे ना जाजो जी,
म्हारा मदन गोपाल।।
सांवरिया थारे पगड़ी को रंग अनार,
यो तीखो तीर चलावे जी,
म्हारा मदन गोपाल।।
सांवरिया थारे राधा रे रुक्मिण लार,
या जोड़ी प्यारी लागे रे,
म्हारा मदन गोपाल।।
सांवरिया थारे हाथां रे मुरली धार,
थे मुरलीधर कहलाओ जी,
म्हारा मदन गोपाल।।
सांवरिया थे तो भगता रा सिरदार,
म्हारी नैया पार लगाजो जी,
म्हारा मदन गोपाल।।
सांवरिया थारा घुँघर वाला बाल,
म्हारो मनड़ो हर लीनो जी,
म्हारा मदन गोपाल।।
म्हारो मनड़ो हर लीजो जी l Singer - Surbhi chaturvedi l Mharo mando har lijo l Kanhaiya sound maroth
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म्हारो मनड़ो हर लीजो जी l Singer - Surbhi chaturvedi l Mharo mando har lijo l Kanhaiya sound maroth 9928141323 !! कन्हैया साउंड मारोठ !! KANHAIYA_ SOUND_ MAROTH
घुँघरुओं की कड़क—बांसुरी के स्वर की तरह दिल में गूँज उठती है; घूंघर वाला बाल जब झुकता है तो समूचा जगन भक्ति में विलीन हो जाता है। नयन की चंचलता में मुरली की मधुरता और राधा-रुक्मणी की जोड़ी का पाक प्रेम झलकता है; उस नज़र का प्रभाव इतना गुंथा हुआ है कि स्मृति कभी धुँधली न पड़ने पाए। पगड़ी का अनार सा रंग और तीरों की तीखी मार, सब मिलकर प्रेम-उत्सव का दृश्य रचते हैं जहाँ हर श्रोता अपना मन स्वतः समर्पित कर देता है। हाथों में मुरली लेकर जो मधुरता बिखेरते हैं, वह शब्दों से नहीं, केवल अनुभूति से समझ में आती है—मन का हार-बस वही एक नाम, वही प्रतिमूर्ति मानकर झुक जाता है। भगतों की निष्ठा में नाव पार पाना आसान हो जाता है, क्योंकि उस प्रेम की लहर हर संकट को पार कराती है और दिल को स्थिर करती है। जय श्री मुरारी, जय श्री मदन गोपाल।
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Author - Saroj Jangir
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