यह एक सुन्दर अष्टक : मधुराष्टकम (Madhurashtakam) है जिसमें श्री कृष्ण जी के बाल समय की "मधुरता" को दर्शाया गया है। मधुराष्टकम के रचियता श्रीवल्लभाचार्य जी (पुष्टिमार्ग) हैं। मधुराष्टकम में बाल श्री कृष्ण जी होंठ, चेहरे, मुस्कान आदि के अतिरिक्त सम्पूर्ण छवि के बारे में वर्णन किया गया है। इस अष्टकम में आठ छंदों के माध्यम से श्री कृष्ण जी की अनुपम छवि का वर्णन प्राप्त होता है। मधुराष्टकम (Madhurashtakam) की रचना के विषय में उल्लेख प्राप्त होता है की वल्लभाचार्य जी को स्वंय श्री कृष्ण जी ने दर्शन दिए थे और उसी समय उन्होंने श्री कृष्ण जी की छवि का सुंदरता से वर्णन किया है। इसके अतिरिक्त श्री वल्लाभाचार्य जी ने संस्कृत भाषा में ही व्यास सूत्र भाष्य, जैमिनी सूत्र भाष्य, भागवत सुबोधिनी टीका, पुष्टि प्रवल मर्यादा और सिद्धांत रहस्य आदि की रचना की है।