केवे भाटी हरजी सुणो गुरुदेवा राजस्थानी भजन
केवे भाटी हरजी सुणो गुरुदेवा राजस्थानी भजन
केवे भाटी हरजी, सुणो गुरुदेवा,
जनम जनम बाबा करूं चरणा की सेवा।
न कोई बात पीरजी आपके छाणे,
थोड़ी तो सुणो बाबा हरजी के काणे।
या संसार प्रभु खंडन कद हेला,
यही तो कह जाओ मारा गिरधर लाला।
सतजुग, द्वापर, त्रेता, कलजुग लागेला,
कलजुग में कला को उपयोग होवेला।
चली जासी जागीरी, महल सूणा ही पड़ेला,
प्रजा का बनेला राजा, हुकम चलेला।
ब्राह्मण होकर हरजी वेद नहीं जाणेला,
मद रे मांस का ब्राह्मण भोजन करेला।
ब्राह्मण की बेटी वो हरिजन फेरा फरेला,
जात रे मर्यादा हरजी फेर नहीं रेवेला।
हिंदू, मुस्लिम, हरजी, सिख, ईसाई,
सुण मारा हरजी, चारों एक हो जाई।
बाप बेटा की हरजी नौकरी करेला,
माई बेटियां हरजी भेद नहीं जाणेला।
गंगा, जमुना, सरस्वती की धारा,
बेरिया खुदेला, जल सूख जासी सारा।
राजा इंद्र कड़केला, अग्नि बरसैला,
बल जल संसार, सारी प्रलय होवेला।
साधु संत थारा भजन करेला,
सुणो मारा बावजी, वो कसेण बचेला।
गट्टी चाकी के बीच दाणा बचेला,
सुण हरजी, मारा भगत बचेला।
फेर जनम ले धरती पे आवांला,
धोला नाम री धजा फडूकावाला।
गढ़ चितौड़, चावरी, दिल्ली में डेरा,
आबू मारूंला, तोरण बिलाड़ा में फेरा।
सुणबा वाला के धणी आप रिज्यो पासा,
सत्संग करे ज्याणे, अन्न दीज्यो दाता।
अन्न धन बैकुंठा को वास नहीं छाऊं,
जनम धरूं मैं पीरजी, भक्ति पाऊं।
अजमल सुत बाबो रामदेवजी बोले,
सत प्रमाण बाबो, सांचा तोले।
आप मिलिया पीरजी, धणी माणे मोटा,
जनम जनम का भाग गया टोटा।
शरणे आया पीरजी, घणा सुख पाया,
बावजी का भजना सूं गंगा जी में नाया।
कोई भक्ता के संका जो होवे,
मेघड़ी प्रमाण पड़िया, भ्रम सब खोवे।
हरि शरणे भाटी हीरानंद बोले,
प्रश्न उत्तर बावजी, हिरदा में तोले।
केवे भाटी हरजी, सुणो गुरुदेवा,
जनम जनम बाबा करूं चरणा की सेवा।
जनम जनम बाबा करूं चरणा की सेवा।
न कोई बात पीरजी आपके छाणे,
थोड़ी तो सुणो बाबा हरजी के काणे।
या संसार प्रभु खंडन कद हेला,
यही तो कह जाओ मारा गिरधर लाला।
सतजुग, द्वापर, त्रेता, कलजुग लागेला,
कलजुग में कला को उपयोग होवेला।
चली जासी जागीरी, महल सूणा ही पड़ेला,
प्रजा का बनेला राजा, हुकम चलेला।
ब्राह्मण होकर हरजी वेद नहीं जाणेला,
मद रे मांस का ब्राह्मण भोजन करेला।
ब्राह्मण की बेटी वो हरिजन फेरा फरेला,
जात रे मर्यादा हरजी फेर नहीं रेवेला।
हिंदू, मुस्लिम, हरजी, सिख, ईसाई,
सुण मारा हरजी, चारों एक हो जाई।
बाप बेटा की हरजी नौकरी करेला,
माई बेटियां हरजी भेद नहीं जाणेला।
गंगा, जमुना, सरस्वती की धारा,
बेरिया खुदेला, जल सूख जासी सारा।
राजा इंद्र कड़केला, अग्नि बरसैला,
बल जल संसार, सारी प्रलय होवेला।
साधु संत थारा भजन करेला,
सुणो मारा बावजी, वो कसेण बचेला।
गट्टी चाकी के बीच दाणा बचेला,
सुण हरजी, मारा भगत बचेला।
फेर जनम ले धरती पे आवांला,
धोला नाम री धजा फडूकावाला।
गढ़ चितौड़, चावरी, दिल्ली में डेरा,
आबू मारूंला, तोरण बिलाड़ा में फेरा।
सुणबा वाला के धणी आप रिज्यो पासा,
सत्संग करे ज्याणे, अन्न दीज्यो दाता।
अन्न धन बैकुंठा को वास नहीं छाऊं,
जनम धरूं मैं पीरजी, भक्ति पाऊं।
अजमल सुत बाबो रामदेवजी बोले,
सत प्रमाण बाबो, सांचा तोले।
आप मिलिया पीरजी, धणी माणे मोटा,
जनम जनम का भाग गया टोटा।
शरणे आया पीरजी, घणा सुख पाया,
बावजी का भजना सूं गंगा जी में नाया।
कोई भक्ता के संका जो होवे,
मेघड़ी प्रमाण पड़िया, भ्रम सब खोवे।
हरि शरणे भाटी हीरानंद बोले,
प्रश्न उत्तर बावजी, हिरदा में तोले।
केवे भाटी हरजी, सुणो गुरुदेवा,
जनम जनम बाबा करूं चरणा की सेवा।
बाबा रामदेव जी महाराज का मेघड़ी प्रमाण//baba ramdev ji maharaj ka megdi praman
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Admin - Saroj Jangir
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