दया कर दान विद्या का हमें परमात्मा देना

दया कर दान विद्या का हमें परमात्मा देना

 
दया कर दान विद्या का हमें परमात्मा देना Daya Kar Daan Vidya Ka

ॐ असतो मा सद्गमय,
तमसो मा ज्योतिर्गमय,
मृत्योर्मा अमृतम्गमय।
दया कर दान विद्या का, हमें परमात्मा देना।
दया करना हमारी आत्मा में, शुद्धता देना।।
हमारे ध्यान में आओ, प्रभु आंखों में बस जाओ।
अंधेरे दिल में आकर के, परम ज्योति जगा देना।।
बहा दो ज्ञान की गंगा, दिलों में प्रेम का सागर।
हमें आपस में मिलजुल कर, प्रभु रहना सिखा देना।।

हमारा धर्म हो सेवा, हमारा कर्म हो सेवा।
सदा इमान हो सेवा, व सेवक जन बना देना।।
वतन के वास्ते जीना, वतन के वास्ते मरना।
वतन पर जां फिदा करना, प्रभु हमको सिखा देना।।
दया कर दान विद्या का, हमें परमात्मा देना।
दया करना हमारी आत्मा में, शुद्धता देना।।

ॐ सहनाववतु, सहनौभुनक्तु, सह वीर्यम करवावहै।
तेजस्वी नावधी तमस्तु, मांविद्विषावहे ।।
ओम शांति: शांति: शांति:

भजन श्रेणी : सरस्वती माता भजन (Saraswati Mata Bhajan)


प्रार्थना || दया कर दान विद्या का ।। daya kar daan vidhya ka || KVS || NVS
Om Asato Ma Sadgamay,
Tamaso Ma Jyotirgamay,
Mrtyorma Amrtamgamay.
Daya Kar Daan Vidya Ka, Hamen Paramaatma Dena.
Daya Karana Hamaari Aatma Mein, Shuddhata Dena..
Hamaare Dhyaan Mein Aao, Prabhu Aankhon Mein Bas Jao.
Andhere Dil Mein Aakar Ke, Param Jyoti Jaga Dena..
Baha Do Gyaan Ki Ganga, Dilon Mein Prem Ka Saagar.
Hamen Aapas Mein Milajul Kar, Prabhu Rahana Sikha Dena..
 
 इस संसार की गहराई में हर मानव के मन को उस भीतर की शुद्ध उजली शक्ति की तलाश होती है। अंधकार और असत्य से बाहर निकलने का मार्ग केवल ज्ञान और प्रेम के प्रकाश से ही संभव है। जब मन और आत्मा में दया और सच्ची विद्या की ज्योति प्रज्ज्वलित होती है, तो वह हर कष्ट और भ्रम को दूर करके एक नई उम्मीद की किरण बना देती है। ऐसी दया न केवल दूसरों के प्रति सहानुभूति फैलाती है, बल्कि अपने भीतर की अशुद्धि और कष्टों को भी दूर करने में मदद करती है। हर सांस में जब प्रेम और सेवा का भाव जागता है, तब व्यक्ति के कर्मों में भी वह दिव्यता झलकती है जो समाज और राष्ट्र की भलाई का आधार बनती है।

जीवन का सार यही है कि हर कार्य सेवा और समर्पण से हो, न कि स्वार्थ या केवल अपनी खुशी के लिए। जब दिल में सेवा की भावना सशक्त होती है, तब जीवन का हर कदम एक पूजा का स्वरूप ले लेता है। देश के लिए तब तक जीना और मरना सचमुच के अर्थ में धर्म बन जाता है, जिससे जीवन की सबसे लंबी यात्रा को सार्थकता मिलती है। इस सेवा के मार्ग पर चलकर ही जीवन की गंगा प्रेम और आत्मीयता से छलकती है, जो सारे बंधनों को तोड़कर मनुष्यता की नई राह बनाती है। यही संसार और आत्मा की वह पूजा है, जो शांति और समृद्धि का सच्चा संदेश देती है। इसके भीतर जो स्थिरता और शांति मिलती है, वह मन को गहरे तक छू जाती है और जीवन को नया प्रकाश प्रदान करती है।

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Saroj Jangir Author Author - Saroj Jangir

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