मेरी चुनर पे रंग गयो डाल यशोदा को लाल भजन
मेरी चुनर पे रंग गयो डाल यशोदा को लाल भजन
मेरी चुनर पे रंग गयो डाल,
यशोदा को लाल वो तो नंद जी को लाल,
निकली थी ओढ़ के मैं पीली चुनरिया,
जाने कहाँ से सखी आयो कन्हैया,
निकली थी ओढ़ के मैं पीली चुनरिया,
जाने कहाँ से सखी आयो कन्हैया,
पीली मेरी चुनर को कर गयो लाल,
यशोदा को लाल वो तो नंद जी को लाल,
मेरी चुनर पे रंग गयो डाल,
यशोदा को लाल वो तो नंद जी को लाल,
विनती करी मैंने हाथ जोड़ के,
कोशिश करी मैंने बचने की दौड़ के,
विनती करी मैंने हाथ जोड़ के,
कोशिश करी मैंने बचने की दौड़ के,
पीछे~पीछे दौड़ा वो तो ले के गुलाल,
यशोदा को लाल वो तो नंद जी को लाल,
मेरी चुनर पे रंग गयो डाल,
यशोदा को लाल वो तो नंद जी को लाल,
कुछ भी सखी मैं कर ना पाई,
जब उसने मेरी पकड़ी कलाई,
कुछ भी सखी मैं कर ना पाई,
जब उसने मेरी पकड़ी कलाई,
सखी मल गयो मेरे मुख पे गुलाल,
यशोदा को लाल वो तो नंद जी को लाल,
मेरी चुनर पे रंग गयो डाल,
यशोदा को लाल वो तो नंद जी को लाल।
यशोदा को लाल वो तो नंद जी को लाल,
निकली थी ओढ़ के मैं पीली चुनरिया,
जाने कहाँ से सखी आयो कन्हैया,
निकली थी ओढ़ के मैं पीली चुनरिया,
जाने कहाँ से सखी आयो कन्हैया,
पीली मेरी चुनर को कर गयो लाल,
यशोदा को लाल वो तो नंद जी को लाल,
मेरी चुनर पे रंग गयो डाल,
यशोदा को लाल वो तो नंद जी को लाल,
विनती करी मैंने हाथ जोड़ के,
कोशिश करी मैंने बचने की दौड़ के,
विनती करी मैंने हाथ जोड़ के,
कोशिश करी मैंने बचने की दौड़ के,
पीछे~पीछे दौड़ा वो तो ले के गुलाल,
यशोदा को लाल वो तो नंद जी को लाल,
मेरी चुनर पे रंग गयो डाल,
यशोदा को लाल वो तो नंद जी को लाल,
कुछ भी सखी मैं कर ना पाई,
जब उसने मेरी पकड़ी कलाई,
कुछ भी सखी मैं कर ना पाई,
जब उसने मेरी पकड़ी कलाई,
सखी मल गयो मेरे मुख पे गुलाल,
यशोदा को लाल वो तो नंद जी को लाल,
मेरी चुनर पे रंग गयो डाल,
यशोदा को लाल वो तो नंद जी को लाल।
होली भजन 2026 ।। मेरी चुनर पे रंग गयो डाल ।। #holi #holispecial #holi2026 #holibhajan #radhekrishna
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फागुन की होली में कृष्ण की लीला अनोखी है। साधक का मन गोपियों की तरह रंगों में सराबोर हो जाता है। पीली चुनर ओढ़कर निकली गोपी को कन्हैया पीछे-पीछे दौड़ाते हैं, हाथ जोड़कर विनती करने पर भी नहीं रुकते। गुलाल से चुनर लाल कर देते हैं, कलाई पकड़कर मुख पर अबीर मल देते हैं। यह रंग सिर्फ चुनर का नहीं, मन का भी हो जाता है। यशोदा माँ का लाल और नंद बाबा का लाल ऐसे रंग बरसाता है कि बचने की सारी कोशिशें व्यर्थ हो जाती हैं। होली का यह खेल प्रेम का ऐसा रंग है जो गोपियों को और भी गहराई से बाँध लेता है, हर तरफ उल्लास और भक्ति फैल जाती है।
श्याम सुंदर, यशोदा के लाल, नंद के लाड़ले, होली में भी अपनी बाल लीला से सबको रंगते हैं। वृंदावन की गलियों में गुलाल बरसाते हुए गोपियों के साथ खेलते हैं, उनकी चुनरियाँ लाल कर देते हैं। उनकी यह महिमा है कि जो भी उनके रंग में रंग जाता है, उसका जीवन प्रेम और आनंद से भर जाता है। वे माखन चोर हैं तो होली में भी रंग चोर बन जाते हैं, किसी को नहीं छोड़ते। भक्त आज भी उनकी इसी लीला को याद कर होली मनाते हैं, चुनर पर रंग डालकर उनके चरणों में समर्पित हो जाते हैं। जय श्री कृष्ण, जय यशोदा के लाल, जय होली के रंग बरसाने वाले कन्हैया!
मेरी चुनर पे रंग गयो डाल, यशोदा को लाल वो तो नन्द जी को लाल ।।
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Author - Saroj Jangir
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