मेरे साईं की है चावडी साई भजन
मेरे साईं की है चावडी साई भजन
मेरे साईं की है चावड़ी,
यहाँ बैठते थे वो शाम को,
कभी "अल्लाह-अल्लाह" बोलते,
कभी जपते थे श्रीराम को।।
कर पास दिल की थी दूरियाँ,
हट नफ़रतों के वो रास्ते,
दिया प्यार का दीपक जला,
महकाया शिर्डी के धाम को।।
मेरे साईं की है चावड़ी,
यहाँ बैठते थे वो शाम को।।
है जुदा-जुदा ये शरीर सब,
पर ख़ून सबका एक है,
क्यों बँट रहे हो अलग-अलग,
पहचान लो इंसान को।।
मेरे साईं की है चावड़ी,
यहाँ बैठते थे वो शाम को।।
यहाँ बैठते थे वो शाम को,
कभी "अल्लाह-अल्लाह" बोलते,
कभी जपते थे श्रीराम को।।
कर पास दिल की थी दूरियाँ,
हट नफ़रतों के वो रास्ते,
दिया प्यार का दीपक जला,
महकाया शिर्डी के धाम को।।
मेरे साईं की है चावड़ी,
यहाँ बैठते थे वो शाम को।।
है जुदा-जुदा ये शरीर सब,
पर ख़ून सबका एक है,
क्यों बँट रहे हो अलग-अलग,
पहचान लो इंसान को।।
मेरे साईं की है चावड़ी,
यहाँ बैठते थे वो शाम को।।
सुबह सुबह इस भजन को आवश्यक सुने : मेरे साई की चावड़ी : Mere Sai Ki Chawari : Sai Bhajan : Om Sai Ram
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➤Song : Mere Sai Ki Chawari
➤Singer : Ustad Rajabally Khan
➤Lyrics : Mahant Om Nath Sharma
➤Arrenger : Raj Kumar
➤Lyrics : Mahant Om Nath Sharma
➤Arrenger : Raj Kumar
उस पवित्र स्थान की महिमा अपार है, जहाँ सायंकाल में वह परम शक्ति उपस्थित होकर सभी के हृदय को एकता और प्रेम के सूत्र में बाँधती थी। वहाँ न कोई भेद था, न कोई द्वेष, केवल प्रेम और भक्ति का प्रकाश फैलता था, जो हर मन में बसी दूरियों को मिटा देता था। यह प्रेम का दीपक था, जो नफरत के अंधेरे को चीरकर, सभी को एक ही ईश्वरीय सत्य की ओर ले जाता था। वह शक्ति, जो विभिन्न नामों और रूपों में पूजी जाती थी, अपने भक्तों को सिखाती थी कि सच्चाई और प्रेम के सामने सभी बाधाएँ नष्ट हो जाती हैं। इस पवित्र वातावरण में, हर प्राणी का मन उस अनंत शक्ति के चिंतन में डूबकर शांति और एकता का अनुभव करता था, जिससे समस्त सृष्टि एक सुगंधित और पवित्र धाम बन जाती थी।
मानवता का सच्चा संदेश वही है, जो सभी को एक समान देखता है, क्योंकि हर प्राणी में वही एक रक्त बहता है, वही एक आत्मा निवास करती है। उस पवित्र स्थान पर यह शिक्षा दी जाती थी कि भेदभाव और अलगाव की दीवारें केवल अज्ञानता का परिणाम हैं। वह शक्ति, जो सभी को एक सूत्र में पिरोती थी, सिखाती थी कि मानवता की पहचान उसकी एकता में है, न कि बँटवारे में। इस संदेश के साथ, वह परम शक्ति हर हृदय को प्रेम और करुणा से जोड़ती थी, ताकि मनुष्य अपने भीतर की सच्चाई को पहचान सके।
मानवता का सच्चा संदेश वही है, जो सभी को एक समान देखता है, क्योंकि हर प्राणी में वही एक रक्त बहता है, वही एक आत्मा निवास करती है। उस पवित्र स्थान पर यह शिक्षा दी जाती थी कि भेदभाव और अलगाव की दीवारें केवल अज्ञानता का परिणाम हैं। वह शक्ति, जो सभी को एक सूत्र में पिरोती थी, सिखाती थी कि मानवता की पहचान उसकी एकता में है, न कि बँटवारे में। इस संदेश के साथ, वह परम शक्ति हर हृदय को प्रेम और करुणा से जोड़ती थी, ताकि मनुष्य अपने भीतर की सच्चाई को पहचान सके।
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Author - Saroj Jangir
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