तू सोच ना पाएगा ऐसा ये खेल रचाएगा

तू सोच ना पाएगा ऐसा ये खेल रचाएगा


तू सोच न पाएगा, ऐसा ये खेल रचाएगा,
चिंता तेरे जीवन की...
श्याम मिटाएगा...

इनके भरोसे जब हो जाएगा, संग में हर पल इनको पाएगा,
ग़फ़लत में खोया रह जाएगा, काम तेरा अटका बन जाएगा।
रहमत की किरपा तुझपे...
ये बरसाएगा...

सेवा इनकी जब भी बजाएगा, उलझन तेरी ये सुलझाएगा,
प्रेम भाव से भजन सुनाएगा, अपने मन को हल्का पाएगा।
बाहों में भर कर तुझको...
गले लगाएगा...

हर परिणाम को तू जो स्वीकारे, बाबा की मर्ज़ी है ये मानें,
बेहतर तेरा मालिक सोच रहा, ऐसा अपने दिल को समझाले।
"मोहित" बातों पे अमल हो...


घर मे चलाके रखो ये भजन सारे कष्ट दूर हो जायँगे | Shyam Bhajan | तू सोच ना पायेगा | Tu Soch Na Payega

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Saroj Jangir Author Author - Saroj Jangir

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