जय साई की बोलिये साईं भजन
जय साई की बोलिये साईं भजन
जय जय साईंराम, जय जय साईंराम,
जय जय साईंराम, जय जय साईंराम।।।
जब भी आँखें मूंदिए, जब भी आँखें खोलिए,
जय साईं की बोलिए, जय साईं की बोलिए,
जब भी आँखें मूंदिए, जब भी आँखें खोलिए,
जय साईं की बोलिए, जय साईं की बोलिए।।।
जय जय साईं बोलिए, जय जय साईं बोलिए,
जय जय साईं बोलिए, जय जय साईं बोलिए,
जब भी आँखें मूंदिए, जब भी आँखें खोलिए,
जय साईं की बोलिए, जय साईं की बोलिए।।।
जय जय साईं, जय जय साईं, जय जय साईं, जय जय साईं,
जय जय साईं, जय जय साईं, जय जय साईं, जय जय साईं।।।
जो साईं की जय बोले, वो आगे बढ़ते जाते हैं,
जय जय साईं कहने से, साईं विजय दिलाते हैं।।।
जय जय साईंराम, जय जय साईंराम,
अपनी भक्ति तौलिए, जय साईं की बोलिए,
जय साईं की बोलिए, जय साईं की बोलिए,
जय जय साईं बोलिए, जय जय साईं बोलिए,
जय जय साईं बोलिए, जय जय साईं बोलिए।।।
जय जय साईंराम, जय जय साईंराम,
जय जय साईंराम, जय जय साईंराम।।।
जयकारा मेरे साईं का, सीधा शिरडी जाता है,
सीधा शिरडी जाता है, सीधा शिरडी जाता है,
सुनकर भक्तों का जयकारा, साईं उन्हें बुलाता है,
साईं उन्हें बुलाता है, साईं उन्हें बुलाता है।।।
यदि साईं के हो लिए, तो जय साईं की बोलिए,
जय साईं की बोलिए, जय साईं की बोलिए,
जय जय साईं बोलिए, जय जय साईं बोलिए,
जय जय साईं बोलिए, जय जय साईं बोलिए।।।
जय जय साईं, जय जय साईं, जय जय साईं, जय जय साईं,
जय जय साईं, जय जय साईं, जय जय साईं, जय जय साईं।।।
इसके दर पे ना राजा, ना रंक कोई राजेन्द्र है,
यह प्रतीक है सर्वधर्म का, धर्मराज धर्मेन्द्र है।।।
जय जय साईंराम, जय जय साईंराम,
जगह-जगह मत डोलिए, जय साईं की बोलिए,
जय जय साईं बोलिए, जय जय साईं बोलिए,
जय जय साईं बोलिए, जय जय साईं बोलिए,
जय जय साईं बोलिए, जय जय साईं बोलिए,
जय जय साईंराम, जय जय साईंराम,
जय जय साईंराम, जय जय साईंराम।।।
जय जय साईंराम, जय जय साईंराम।।।
जब भी आँखें मूंदिए, जब भी आँखें खोलिए,
जय साईं की बोलिए, जय साईं की बोलिए,
जब भी आँखें मूंदिए, जब भी आँखें खोलिए,
जय साईं की बोलिए, जय साईं की बोलिए।।।
जय जय साईं बोलिए, जय जय साईं बोलिए,
जय जय साईं बोलिए, जय जय साईं बोलिए,
जब भी आँखें मूंदिए, जब भी आँखें खोलिए,
जय साईं की बोलिए, जय साईं की बोलिए।।।
जय जय साईं, जय जय साईं, जय जय साईं, जय जय साईं,
जय जय साईं, जय जय साईं, जय जय साईं, जय जय साईं।।।
जो साईं की जय बोले, वो आगे बढ़ते जाते हैं,
जय जय साईं कहने से, साईं विजय दिलाते हैं।।।
जय जय साईंराम, जय जय साईंराम,
अपनी भक्ति तौलिए, जय साईं की बोलिए,
जय साईं की बोलिए, जय साईं की बोलिए,
जय जय साईं बोलिए, जय जय साईं बोलिए,
जय जय साईं बोलिए, जय जय साईं बोलिए।।।
जय जय साईंराम, जय जय साईंराम,
जय जय साईंराम, जय जय साईंराम।।।
जयकारा मेरे साईं का, सीधा शिरडी जाता है,
सीधा शिरडी जाता है, सीधा शिरडी जाता है,
सुनकर भक्तों का जयकारा, साईं उन्हें बुलाता है,
साईं उन्हें बुलाता है, साईं उन्हें बुलाता है।।।
यदि साईं के हो लिए, तो जय साईं की बोलिए,
जय साईं की बोलिए, जय साईं की बोलिए,
जय जय साईं बोलिए, जय जय साईं बोलिए,
जय जय साईं बोलिए, जय जय साईं बोलिए।।।
जय जय साईं, जय जय साईं, जय जय साईं, जय जय साईं,
जय जय साईं, जय जय साईं, जय जय साईं, जय जय साईं।।।
इसके दर पे ना राजा, ना रंक कोई राजेन्द्र है,
यह प्रतीक है सर्वधर्म का, धर्मराज धर्मेन्द्र है।।।
जय जय साईंराम, जय जय साईंराम,
जगह-जगह मत डोलिए, जय साईं की बोलिए,
जय जय साईं बोलिए, जय जय साईं बोलिए,
जय जय साईं बोलिए, जय जय साईं बोलिए,
जय जय साईं बोलिए, जय जय साईं बोलिए,
जय जय साईंराम, जय जय साईंराम,
जय जय साईंराम, जय जय साईंराम।।।
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हृदय में हर पल प्रभु का नाम गूंजता है, जो हर सांस के साथ उनकी जय-जयकार करता है। चाहे आंखें बंद हों या खुली हों, मन केवल उनकी भक्ति में लीन रहता है, मानो हर क्षण उनकी महिमा का गान ही जीवन का आधार हो। यह भावना प्रभु के प्रति अटूट श्रद्धा को दर्शाती है, जो भक्त को हर कदम पर आगे बढ़ने की प्रेरणा देती है। प्रभु का नाम जपने से मन को विजय का विश्वास मिलता है, और यह विश्वास जीवन की हर बाधा को पार करने की शक्ति प्रदान करता है। उनकी भक्ति में डूबकर मन इस सत्य को अनुभव करता है कि प्रभु का नाम ही हर दुख को हरने वाला और हर मार्ग को प्रशस्त करने वाला है।
प्रभु का जयकारा सीधे उनके धाम तक पहुंचता है, जहां उनकी कृपा भक्तों को अपनी ओर बुलाती है। यह विश्वास हृदय में बस्ता है कि प्रभु के दर पर न कोई राजा है न रंक, बल्कि सभी एक समान हैं, क्योंकि वे सर्व धर्म के प्रतीक हैं। उनकी शरण में आकर मन भटकना छोड़ देता है और केवल उनके नाम में ही शांति और सत्य पाता है। यह भावना मन को इस सत्य से जोड़ती है कि प्रभु का दर ही वह स्थान है, जहां हर भक्त को समान रूप से प्रेम और कृपा मिलती है, और उनका नाम जपने से जीवन का हर लक्ष्य प्राप्त हो जाता है।
प्रभु का जयकारा सीधे उनके धाम तक पहुंचता है, जहां उनकी कृपा भक्तों को अपनी ओर बुलाती है। यह विश्वास हृदय में बस्ता है कि प्रभु के दर पर न कोई राजा है न रंक, बल्कि सभी एक समान हैं, क्योंकि वे सर्व धर्म के प्रतीक हैं। उनकी शरण में आकर मन भटकना छोड़ देता है और केवल उनके नाम में ही शांति और सत्य पाता है। यह भावना मन को इस सत्य से जोड़ती है कि प्रभु का दर ही वह स्थान है, जहां हर भक्त को समान रूप से प्रेम और कृपा मिलती है, और उनका नाम जपने से जीवन का हर लक्ष्य प्राप्त हो जाता है।
Song Name: Sai Sai Boliye
Album: Chalo Re Sai
Singer & Music Director: Jaspal Singh
Lyrics: Shreekant Mishra
Graphics: Prem Graphic. PG.
Album: Chalo Re Sai
Singer & Music Director: Jaspal Singh
Lyrics: Shreekant Mishra
Graphics: Prem Graphic. PG.
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Author - Saroj Jangir
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