चरणों में गुरुवर के प्रणाम करता हूँ

चरणों में गुरुवर के प्रणाम करता हूँ


चरणों में गुरुवर के, प्रणाम करता हूँ,
स्वीकार कीजिए, दास की वंदना।

गुरुजी आप दयालु हैं, आप ही दयावान,
करते हैं हम पर सदा, कृपा अज्ञान।
भूलों को क्षमा करते हैं, शरण में अपनी लेते हैं,
स्वीकार कीजिए, दास की वंदना।

हम तो भटक रहे थे, घोर अंधकार में,
कोई मंज़िल न थी, जीवन के संसार में।
प्रेम का दीप जला दिया, धर्म-पथ सिखा दिया,
स्वीकार कीजिए, दास की वंदना।

अब तो मन में हमारे, बस एक ही लगन,
कृपा कर दें आप, हो जाए प्रभु से मिलन।
भक्ति का वर दे देना, प्रभु से बात कर देना,
स्वीकार कीजिए, दास की वंदना।


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गुरु वंदना :-चरणों मे गुरुवर के प्रणाम करता हूँ, स्वीकार कीजिये दास की वंदना
चरणों में गुरुवर के,प्रणाम करता हूँ,स्वीकार कीजिए,दास की वंदना ।। 
तर्ज - ये रेशमी जुल्फें।
PM Modi With Guri Ji
Dedicated to Pujya Gurudev - Mahant Pujya Shri Nritya Gopal Das Ji Maharaj,
 
गुरु के चरणों में सिर झुकाकर उनकी वंदना की जाती है, और उनसे इसे स्वीकार करने की प्रार्थना की जाती है। गुरु दयालु और कृपावान हैं, जो सदा उपकार करते हैं, भूलों को क्षमा कर शरण में लेते हैं। अंधकार में भटकते हुए, जब संसार में कोई मंजिल नजर नहीं आती थी, तब गुरु ने प्रेम का दीपक जलाकर धर्म का मार्ग दिखाया। अब मन में एकमात्र लगन है कि उनकी कृपा से प्रभु से मिलन हो जाए। गुरु से भक्ति का वर माँगा जाता है, और उनसे प्रभु के सामने थोड़ी सिफारिश करने की विनती की जाती है। यह भजन गुरु के प्रति पूर्ण समर्पण, उनकी कृपा से मार्गदर्शन, और भक्ति के माध्यम से ईश्वर से मिलन की भावना को व्यक्त करता है।
 
 सतगुरु ज्ञान, प्रेम और शक्ति का स्रोत हैं। वे शिष्य के जीवन में अज्ञान के अंधकार को दूर करके ज्ञान का प्रकाश फैलाते हैं। सतगुरु की कृपा से ही शिष्य को अपने भीतर छिपे परम तत्त्व का साक्षात्कार होता है और उसे जीवन का वास्तविक उद्देश्य समझ में आता है। सतगुरु ने शिष्य के ज्ञान-चक्षु खोल दिए हैं, जिससे वह परम तत्त्व को साक्षात्कार कर सकता है। ईश्वरीय आलोक को दृश्य बनाने का श्रेय महान गुरु को ही है। उनके द्वारा किए गए उपकारों का कोई अंत नहीं है। 
 
Saroj Jangir Author Author - Saroj Jangir

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