हर पल दा ओ दातिया शुक्राना तेरा
हर पल दा ओ दातिया शुक्राना तेरा
हर पल दा ओ दातिया शुक्राना तेरा
जो भी मेरे पास है वह नजराना तेरा
हर पल दा ओ दातिया
मुझ पर हर पल तेरी इतनी किरपा हुई
देख कर तेरी किरपा मेरी आँखें रोई
तू जाने देने का क्या है बहाना तेरा
हर पल दा ओ दातिया
यह अहसास है मुझको यही दिल ने माना
तेरी किरपा बड़ी दाता मेरा छोटा शुक्राना
तू मुस्काए तो होता है मुस्काना मेरा
हर पल दा ओ दातिया
तेरी किरपा की छाया हो ज्ञान के सर पे
कहे पुनीत मैं बैठा रहूँ बस तेरे दर पे
शायद तुझको भा गया है झुक जाना मेरा
हर पल दा ओ दातिया
जो भी मेरे पास है वह नजराना तेरा
हर पल दा ओ दातिया
मुझ पर हर पल तेरी इतनी किरपा हुई
देख कर तेरी किरपा मेरी आँखें रोई
तू जाने देने का क्या है बहाना तेरा
हर पल दा ओ दातिया
यह अहसास है मुझको यही दिल ने माना
तेरी किरपा बड़ी दाता मेरा छोटा शुक्राना
तू मुस्काए तो होता है मुस्काना मेरा
हर पल दा ओ दातिया
तेरी किरपा की छाया हो ज्ञान के सर पे
कहे पुनीत मैं बैठा रहूँ बस तेरे दर पे
शायद तुझको भा गया है झुक जाना मेरा
हर पल दा ओ दातिया
शुक्राना तेरा | Shukrana Tera | Puneet Khurana | Jai Guru Ji | New Guru Ji Bhajan #guruji
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हर पल सतगुरु की कृपा का शुक्राना किया जाता है, क्योंकि जो कुछ भी पास है, वह उनका ही नजराना है। उनकी असीम कृपा को देखकर आँखें छलक उठती हैं, और यह महसूस होता है कि देने के लिए उन्हें कोई बहाना नहीं चाहिए। उनकी कृपा इतनी विशाल है कि उसके सामने शुक्राना छोटा लगता है, और उनकी मुस्कान से ही मन मुस्कुरा उठता है। उनकी कृपा की छाया में ज्ञान का प्रकाश मिलता है, और बस उनके दर पर बैठकर जीवन बिताने की इच्छा जागती है। शायद उन्हें यह सिर झुकाना भा गया है। यह भजन सतगुरु की असीम कृपा, उनके प्रति कृतज्ञता, और उनकी शरण में रहकर जीवन को धन्य बनाने की भावना को व्यक्त करता है।
Song : - शुक्राना तेरा | Shukrana Tera
Singer : Puneet Khurana
Lyrics :- Gyan Pankaj
Music : Raj Atul Sahu
Arranged by :- Raj Atul Sahu
Label. :- PK Official
Singer : Puneet Khurana
Lyrics :- Gyan Pankaj
Music : Raj Atul Sahu
Arranged by :- Raj Atul Sahu
Label. :- PK Official
सतगुरु अपनी कृपा से शिष्य के हृदय में श्रद्धा, प्रेम और समर्पण का भाव भर देते हैं। उनकी महिमा इतनी विशाल है कि शिष्य जब उनके सानिध्य में होता है, तो उसके मन की उथल-पुथल शांत हो जाती है और उसे जीवन का वास्तविक उद्देश्य समझ में आने लगता है। सतगुरु ही शिष्य को आत्मिक उन्नति, सुख, शांति और मोक्ष के मार्ग पर अग्रसर करते हैं।
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Author - Saroj Jangir
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