लूट सके तो लूट ले भाई साँई नाम की लूट

लूट सके तो लूट ले भाई साँई नाम की लूट

लूट सके तो लूट ले भाई, साईं नाम की लूट,
लूट सके तो लूट ले भाई, साईं नाम की लूट।
श्रद्धा-सबूरी से बना ले, साईं से रिश्ता अटूट,
श्रद्धा-सबूरी से बना ले, साईं से रिश्ता अटूट।
चारों दिशाएं, चारों धाम,
एक ही नाम – साईंराम,
बिगड़े बना दे सारे काम,
साईंराम, साईंराम।।

तन-मन-धन से सुबह-शाम, जप लो प्रभु का नाम,
प्रभु की द्वारका माई और शिरडी पावन धाम।
हर दुख से तू दे मुक्ति,
दिल से करे जो भक्ति,
अपरंपार है लीला तेरी,
तू ही दिव्य शक्ति,
तू ही दिव्य शक्ति।
अपने आप से कब तक मनवा बोलेगा रे झूठ?
श्रद्धा-सबूरी से बना ले, साईं से रिश्ता अटूट।
श्रद्धा-सबूरी से बना ले, साईं से रिश्ता अटूट।
चारों दिशाएं, चारों धाम,
एक ही नाम – साईंराम,
बिगड़े बना दे सारे काम,
साईंराम, साईंराम।।


Sai Naam Ki Loot | Sai Baba New Song | Sonu Singh | Sai Baba Bhajan | Bhakti Song

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Song Name: Sai Naam Ki Loot
Singer: Sonu Singh 
Lyrics: Monty Sharma
Director: Twelve Strings Productions
Music Composer: Monty Sharma
 
भक्त का हृदय जब उस परम सत्ता के नाम की लूट में डूब जाता है, तब वह एक ऐसी अनमोल संपदा पाता है, जो सांसारिक धन-दौलत से कहीं बढ़कर है। यह लूट वह अनंत प्रेम और भक्ति है, जो श्रद्धा और सबूरी के बल पर उस साईं के साथ एक अटूट रिश्ता जोड़ती है। यह रिश्ता मन को सत्य और शांति की ओर ले जाता है, जहाँ चारों दिशाओं और चारों धामों में केवल एक ही नाम गूंजता है, जो हर बिगड़े काम को बना देता है। भक्त का मन इस विश्वास से भर उठता है कि उस सत्ता की कृपा से हर दुख से मुक्ति मिलती है, और उसका जीवन उस पवित्र नाम के जाप से सुबह-शाम आलोकित हो जाता है। यह भक्ति का वह मार्ग है, जो भक्त को स्वयं के झूठे अहंकार से मुक्त कर, उसे उस सत्य के समीप ले जाता है, जो जीवन का आधार है।

उस साईं की लीला अपरंपार है, जो हर भक्त के हृदय में दिव्य शक्ति के रूप में विराजमान है। उसकी माया और उसके पावन धाम—चाहे वह द्वारका हो या शिरडी—हर प्राणी को अपनी शरण में बुलाते हैं। भक्त जब तन, मन और धन से उस सत्ता की भक्ति में लीन होता है, तब वह अपने जीवन के हर दुख और बंधन से मुक्त हो जाता है। यह भक्ति केवल नाम जपने तक सीमित नहीं, बल्कि एक ऐसी जीवनशैली है, जो श्रद्धा और धैर्य के साथ उस साईं के प्रति पूर्ण समर्पण को दर्शाती है। यह समर्पण भक्त को उस अनंत शक्ति के साथ जोड़ता है, जो उसके जीवन को सार्थक बनाती है और उसे हर परिस्थिति में सत्य और प्रेम के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देती है।
 
Saroj Jangir Author Author - Saroj Jangir

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