श्री राम जपो रघुवंश मणि भजन

श्री राम जपो रघुवंश मणि भजन

श्री राम जपो रघुवंश मणि, मिट जाए तीनों ताप,
काल कांपे, जम थरथरे, ऐसा है नाम प्रताप।

भज राम-सिया, मूर्ख जिया,
ऐसन सुन्दर देहिया बार-बार ना मिली,
बिना भजन के देहिया भाव से पार ना चली।

भज राम-सिया, मूर्ख जिया,
ऐसन सुन्दर देहिया बार-बार ना मिली,
बिना भजन के देहिया भाव से पार ना चली।

भज राम-सिया, मूर्ख जिया,
ऐसन सुन्दर देहिया बार-बार ना मिली,
बिना भजन के बेड़ा पार ना लगी।

जिंदगी की आस नहीं है, कईले भजनीया,
माया के बाजार में एक दिन छूट जाएगी दुनिया,
छूट जाएगी दुनिया, छूट जाएगी दुनिया।

राम नाम का दिया, भरे अपने हिया,
कभी जीवन पथ में अंधियार ना मिली,
बिना भजन के देहिया भाव से पार ना चली।

भज राम-सिया, मूर्ख जिया,
ऐसन सुन्दर देहिया बार-बार ना मिली,
बिना भजन के देहिया भाव से पार ना चली।



विडियो बहुत छोटा हैं.... लेकिन.... आनंद बहुत बड़ा हैं.....

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Saroj Jangir Author Admin - Saroj Jangir

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