लाज रखो मोरी हे गिरधारी कृष्ण मुरारी भजन
लाज रखो मोरी हे गिरधारी कृष्ण मुरारी भजन
हे गिरधारी, हे गिरधारी,हे गिरधारी, हे गिरधारी,
कृष्ण मुरारी,
लाज रखो मोरी, हे गिरधारी,
लाज रखो मोरी, हे गिरधारी।
पाँच पति सिर नीचे किए हैं,
पाँच पति सिर नीचे किए हैं,
वही गदा, वही गदा,
वहीं गाण्डीवधारी,
लाज रखो मोरी, हे गिरधारी,
लाज रखो मोरी, हे गिरधारी।
बाबा (पितामह) भी क्यों चुप बैठे हैं,
पता नहीं, पता नहीं,
उनको क्या लाचारी,
लाज रखो मोरी, हे गिरधारी,
लाज रखो मोरी, हे गिरधारी।
मैं समझी थी कि एक है अन्धा,
यहाँ तो अन्धी, यहाँ तो अन्धी,
सभा है सारी,
लाज रखो मोरी, हे गिरधारी,
लाज रखो मोरी, हे गिरधारी।
अब मैं आस करुँ कहो किस पर,
यहाँ सब बैठे,यहाँ सब बैठे,
बैठे हैं जुआरी,
लाज रखो मोरी, हे गिरधारी,
लाज रखो मोरी, हे गिरधारी।
ऐसे ही दया बनाए रखना,
'फणी' पै सदा, फणी पे सदा,
दया है तुम्हारी,
लाज रखो मोरी, हे गिरधारी,
लाज रखो मोरी, हे गिरधारी।
हे गिरधारी, हे गिरधारी,
कृष्ण मुरारी,
हे गिरधारी, हे गिरधारी,
कृष्ण मुरारी,
लाज रखो मोरी, हे गिरधारी,
लाज रखो मोरी, हे गिरधारी।
भजन श्रेणी : कृष्ण भजन (Krishna Bhajan)
भजन श्रेणी : खाटू श्याम जी भजन (Khatu Shyam Ji Bhajan)
लाज रखो मोरी हे गिरधारी (Laj rakho mori he girdhari)---Bhajn By Dhiraj Kant
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Hey Giradhari, Hey Giradhari,
Krishna Murari,
Hey Giradhari, Hey Giradhari,
Krishna Murari,
Laaj Rakho Mori, Hey Giradhari,
Laaj Rakho Mori, Hey Giradhari.
द्रौपदी की वह पुकार आज भी दिल को छू जाती है। सभा में सबके सामने अपमान हो रहा था, पाँच पति सिर झुकाए खड़े थे, गदा और गाण्डीवधारी भी चुप थे। पितामह भी मौन थे, कोई कुछ बोल नहीं पा रहा था। सारी सभा अंधी हो चुकी थी, जुआरी लोग बैठे थे और बस एक ही आस थी – गिरधारी की। जब सब ओर से निराशा छा गई, तब द्रौपदी ने सिर्फ कृष्ण मुरारी से लाज रखने की विनती की। और गिरधारी ने अपनी दया बनाए रखी। अनंत वस्त्रों की धारा बह निकली, अपमान मिट गया।
ऐसे ही जीवन में जब चारों तरफ से सहारा टूट जाए, जब अपने भी सिर झुका लें और कोई आवाज न निकले, तब भी एक नाम याद आता है – हे गिरधारी। जो सच्चे मन से पुकारता है, उसकी लाज वे हमेशा रख लेते हैं। चाहे कितना भी अंधेरा क्यों न छा जाए, उनकी दया का हाथ हमेशा ऊपर रहता है। दया बनाए रखना, बस यही अरदास है। फणी की तरह हम भी तेरे चरणों में आस लगाए बैठे हैं। लाज रखो मोरी, हे गिरधारी। आप सभी पर ईश्वर की कृपा बनी रहे। जय श्री कृष्ण जी की।