मात पिता को छोड़ के बन्नी हो गई आज पराई
बन्नी हो गई आज पराई रे,
जिन गलियों में बचपन बीता,
वही गली बिसराई रे।
जिन गलियों में बचपन बीता,
वही गली बिसराई रे।
माथे बन्नी जी के बेंदी सोहै,
टीका लिखा बिदाई रे,
जिन गलियों में बचपन बीता,
वही गली बिसराई रे।
कान बन्नी जी के झूमक सोहै,
कुंडल लिखा बिदाई रे,
जिन गलियों में बचपन बीता,
वही गली बिसराई रे।
गले बन्नी जी के चैना सोहै,
हरबा लिखा बिदाई रे,
जिन गलियों में बचपन बीता,
वही गली बिसराई रे।
हाँथ बन्नी जी के चुड़िया सोहै,
कंगना लिखा बिदाई रे,
जिन गलियों में बचपन बीता,
वही गली बिसराई रे।
मात पिता को छोड़ के,
बन्नी हो गई आज पराई रे,
जिन गलियों में बचपन बीता,
वही गली बिसराई रे।
जिन गलियों में बचपन बीता,
वही गली बिसराई रे।
भजन श्रेणी : विविध भजन/ सोंग लिरिक्स हिंदी Bhajan/ Song Lyrics
बन्नी विवाह गीत || माता-पिता को छोड़ के बन्नी हो गई आज पराई रे..|| BANNI || NARENDRA OFFICIAL
#गायक - रूपा सिंह, कोमल सिंह
#गीत - बन्नी गीत
Mat Pita Ko Chhod Ke,
Banni Ho Gai aj Parai Re,
Jin Galiyon Mein Bachapan Bita,
Vahi Gali Bisarai Re.
Jin Galiyon Mein Bachapan Bita,
Vahi Gali Bisarai Re.
जीवन में एक ऐसा क्षण आता है जब बेटी (बन्नी) अपने माता-पिता के घर, अपनी बचपन की गलियों को छोड़कर हमेशा के लिए पराई हो जाती है। यह विदाई एक लड़की के जीवन का सबसे मार्मिक और अनिवार्य मोड़ है, जहाँ उसके हृदय में नए जीवन का उत्साह भी है, और पुराने घर को छोड़ने का गम भी है। जिन गलियों में उसका बचपन हँसते-खेलते बीता था, आज वही गलियाँ उसे पीछे छूटती हुई नज़र आती हैं—यह एहसास हर माता-पिता और हर बेटी के लिए हृदय को भारी कर देने वाला होता है।
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