जच्चा ने खाये रसगुल्ले सोहर गीत

जच्चा ने खाये रसगुल्ले सोहर गीत Jaccha Ne Khaye Rasgulle Lyrics

 
जच्चा ने खाये रसगुल्ले सोहर गीत Jaccha Ne Khaye Rasgulle Lyrics

जच्चा ने खाये रसगुल्ले,
पलँग के नीचे पत्ते पड़े है।

बिना बुलाये सासू मेरे मत अइयों
भेजूंगी बैंड और बाजा
बाजा के संग राजा
राजा के संग आना पड़ेगा
जच्चा ने खाये रसगुल्ले,
पलँग के नीचे पत्ते पड़े है।

बिना बुलाये जिठनी मेरे मत अइयों
भेजूंगी बैंड और बाजा
बाजा के संग राजा
राजा के संग आना पड़ेगा
जच्चा ने खाये रसगुल्ले,
पलँग के नीचे पत्ते पड़े है।

बिना बुलाये छोटी मेरे मत अइयों
भेजूंगी बैंड और बाजा
बाजा के संग राजा
राजा के संग आना पड़ेगा
जच्चा ने खाये रसगुल्ले,
पलँग के नीचे पत्ते पड़े है।

बिना बुलाये ननदी मेरे मत अइयों
भेजूंगी बैंड और बाजा
बाजा के संग राजा
राजा के संग आना पड़ेगा
जच्चा ने खाये रसगुल्ले,
पलँग के नीचे पत्ते पड़े है।

बिना बुलाये देवर मेरे मत अइयों
भेजूंगी बैंड और बाजा
बाजा के संग राजा
राजा के संग आना पड़ेगा

लोक गीत श्रेणी : लोकगीत Lokgeet/Folk Song

सोहर गीत। जच्चा ने खाये रसगुल्ले (with lyrics)song by braj geet

इस रचना में देसी लोक जीवन की वही मिठास झलकती है, जो हमारे गाँवों के आँगन और हँसी-खुशी से भरे परिवारों में सहज मिलती है। यहाँ प्रसंग केवल जच्चा (नवजात शिशु की माँ) का नहीं, बल्कि पूरे घर की उल्लास-भरी हलचल का है। रसगुल्लों की मिठास, पत्तों की सजावट, बैंड-बाजे की बात — सब मिलकर उस पल की लय बनाते हैं जब घर में नए जीवन के आगमन से हर कोना गूँज उठता है। इसमें जो हास्य और अपनापन है, वह भारतीय परिवारों के उस लोकस्वर को दर्शाता है जहाँ रिश्तों में तकरार भी प्यार की भाषा होती है। “बिना बुलाये मत अइयों” कहना कोई मनाही नहीं, बल्कि एक हँसमुख टोका है — जो स्नेह और मज़ाक की सीमा पर नाचता है।

सोहार गीत केवल जन्म की खुशी का संगीत नहीं होते, बल्कि उस सामाजिक और भावनात्मक ताने-बाने का हिस्सा हैं, जिसमें जीवन का आरंभ एक उत्सव बन जाता है। जब किसी घर में नवजीवन आता है, तो वातावरण अपने आप बदल जाता है — मुस्कराहटों, गीतों और मंगल ध्वनियों से भरा। इन गीतों में माँ की पीड़ा और उसके बाद की प्रसन्नता, परिवार की अभिलाषाएँ और आशीर्वाद, सब कुछ एक साथ घुला रहता है। “सोहार” केवल शब्द नहीं, बल्कि उस क्षण का प्रतीक है जब ईश्वर की कृपा धरती पर उतरती है और हर कोई उस नन्हे जीवन को देखकर भविष्य की आशाओं में डूब जाता है। महिलाओं की सामूहिक आवाज़ में ढोलक की थाप जैसे हर आशीर्वाद को गूंजा देती है — “जीवन लंबा हो, सुख-समृद्धि मिले, और यह परिवार सदा उज्जवल बना रहे।” 

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