भोलेनाथ शम्भुनाथ शम्भुनाथ गोरीनाथ शिव भजन
भोलेनाथ शम्भुनाथ शम्भुनाथ गोरीनाथ शिव भजन
भोलेनाथ भोलेनाथ शम्भुनाथ,
शम्भुनाथ गोरीनाथ गोरीनाथ
ओघड़दानी, तेरे नाम लिखदी मैंने
जिंदगानी।।
तेरे नाम लिखदी मैंने जिंदगानी...
1.
मेरी नाव सिर्फ एक तेरे सहारे,
तूं ना सम्भालें तो हमें कौन सम्भाले
भोलेनाथ भोलेनाथ शम्भुनाथ,
शम्भुनाथ गोरीनाथ गोरीनाथ।।
ओघड़दानी, तेरे नाम लिखदी मैंने
जिंदगानी
तेरे नाम लिखदी मैंने जिंदगानी...
2.
तुझे छोड़ जाऊं मैं अब किसके द्वारे,
तूं ना सम्भालें तो हमें कौन सम्भाले
भोलेनाथ भोलेनाथ शम्भुनाथ,
शम्भुनाथ गोरीनाथ गोरीनाथ।।
ओघड़दानी, तेरे नाम लिखदी मैंने
जिंदगानी
तेरे नाम लिखदी मैंने जिंदगानी...
3.
भोलेनाथ धसका के हो नैन के तारे,
मेरे सारे काज स्वामी आप सवारें
भोलेनाथ भोलेनाथ शम्भुनाथ,
शम्भुनाथ गोरीनाथ गोरीनाथ।।
ओघड़दानी, तेरे नाम लिखदी मैंने
जिंदगानी
तेरे नाम लिखदी मैंने जिंदगानी...
शम्भुनाथ गोरीनाथ गोरीनाथ
ओघड़दानी, तेरे नाम लिखदी मैंने
जिंदगानी।।
तेरे नाम लिखदी मैंने जिंदगानी...
1.
मेरी नाव सिर्फ एक तेरे सहारे,
तूं ना सम्भालें तो हमें कौन सम्भाले
भोलेनाथ भोलेनाथ शम्भुनाथ,
शम्भुनाथ गोरीनाथ गोरीनाथ।।
ओघड़दानी, तेरे नाम लिखदी मैंने
जिंदगानी
तेरे नाम लिखदी मैंने जिंदगानी...
2.
तुझे छोड़ जाऊं मैं अब किसके द्वारे,
तूं ना सम्भालें तो हमें कौन सम्भाले
भोलेनाथ भोलेनाथ शम्भुनाथ,
शम्भुनाथ गोरीनाथ गोरीनाथ।।
ओघड़दानी, तेरे नाम लिखदी मैंने
जिंदगानी
तेरे नाम लिखदी मैंने जिंदगानी...
3.
भोलेनाथ धसका के हो नैन के तारे,
मेरे सारे काज स्वामी आप सवारें
भोलेनाथ भोलेनाथ शम्भुनाथ,
शम्भुनाथ गोरीनाथ गोरीनाथ।।
ओघड़दानी, तेरे नाम लिखदी मैंने
जिंदगानी
तेरे नाम लिखदी मैंने जिंदगानी...
Bholenath ji | Hashtag pandit | Abhilipsa panda | Tera roop hai prachand | Har har Shambhu
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महफिल में बैठने का भाव एक आंतरिक बुलावा और साझी श्रद्धा का संकेत है। वहां पहुँचकर मन एकाग्र, प्रसन्न और उम्मीद से भरा होता है; भजन‑रागों की धुनें जैसे भीतर की खिड़कियाँ खोल देती हैं और आत्मा संगीत की लहरों में बह जाती है। गीतों में पाई जाने वाली दयालुता और कृपा की झलक सुनने वाले के हृदय को नम करती है और एक सहज विश्वास जगाती है कि इस महफिल में शांति, प्रेम और संरक्षण मिलेगा।
संबोधित स्वर की समझदारी और सूक्ष्मता यह दर्शाती है कि वह हृदय के भावों को पढ़ लेता है — कभी अपनी पीड़ा कभी दूसरों की व्यथा वह समेट लेता है। ऐसे सहृदय और निपुण व्यक्तित्व के साथ होने पर आत्मा को एक भरोसा मिलता है कि कठिनाइयों का हल संभव है; उसकी उपस्थिति संकटों को हल्का कर देती है और मनोबल बढ़ाती है।
संबोधित स्वर की समझदारी और सूक्ष्मता यह दर्शाती है कि वह हृदय के भावों को पढ़ लेता है — कभी अपनी पीड़ा कभी दूसरों की व्यथा वह समेट लेता है। ऐसे सहृदय और निपुण व्यक्तित्व के साथ होने पर आत्मा को एक भरोसा मिलता है कि कठिनाइयों का हल संभव है; उसकी उपस्थिति संकटों को हल्का कर देती है और मनोबल बढ़ाती है।
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Author - Saroj Jangir
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