हो मेरे गुरु जी पालनहार सतगुरु भजन

हो मेरे गुरु जी पालनहार सतगुरु भजन

हो मेरे गुरु जी पालनहार तेरा सजेया रवे दरबार,
मैं मंगदी रवा दिन रात तू वंडदा रवे हर वार
हो मेरे गुरु जी पालनहार तेरा सजेया रवे दरबार,

कोई खाली नही जाता है जो दर तेरे ते मंगदा ऐ,
तेरे दर दी बगियाँ दा भी हर इक गुलशन खिल्दा ऐ,
तेरे मंदिर दा परशाद मैं भर भर खावा हाथ
हो मेरे गुरु जी पालनहार तेरा सजेया रवे दरबार,

सत संग विच तुसी बुला के कर्मा नु तुसी घ्ताउंदे ओ
दुःख रोग दलीदर नु भी तुसी साथो दूर न सोहंदे ओ
शिव शम्भू दा अवतार करे सब दा बेडा पार
हो मेरे गुरु जी पालनहार तेरा सजेया रवे दरबार,

रोगा नु दूर हटा के साडे मन नु शुद्ध बनाया ऐ,
सबना नु इको समजो साहणु इको पाठ पड़ाया ऐ,
शुकराना करे संसार एहियो रहमत दा दरबार
हो मेरे गुरु जी पालनहार तेरा सजेया रवे दरबार,



Mere Guruji Palanhar- Satgurudev Bhajan

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गुरु जी का दरबार सजा रहता है, जैसे कोई पालनहार हमेशा तैयार बैठा हो। दिन-रात माँगने वाला जो भी आता है, खाली हाथ नहीं लौटता। दर की बगिया में हर फूल खिलता है, मंदिर का प्रसाद भर-भर के हाथों में आता है। वो दर इतना उदार है कि हर पुकार पर कृपा बरसती है, और मन को भर देता है।

सत्संग में बुलाकर कर्मों को संवारते हैं, दुख, रोग और गरीबी को दूर रखते हैं। शिव शंभू का अवतार बनकर सबका बेड़ा पार लगाते हैं। रोग हटाकर मन को शुद्ध करते हैं, सबको एक समान समझ सिखाते हैं। संसार इसी रहमत के दरबार का शुक्रिया अदा करता है, क्योंकि गुरु जी की कृपा से जीवन का हर पल हल्का और सुंदर हो जाता है।
 
Saroj Jangir Author Admin - Saroj Jangir

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