नबजिया वैद क्या जाने मुझे दिल की बीमारी भजन
नबजिया वैद क्या जाने मुझे दिल की बीमारी भजन
नबजिया वैद क्या जाने,मुझे दिल की बीमारी है ||
नबजिया वैद क्या जाने,
मुझे दिल की बीमारी है ||
कभी कफ रोग बतलाये,
कभी तासीर गरमी की,
जिगर का हाल तू मेरा,
नहीं जाने अनाडी है,
नबजिया वैद क्या देखे,
मुझे दिल की बीमारी है ||
सनम कि मोहिनी मूरत,
बसी दिल बीच में मेरे,
न मन में चैन है तन की,
खबर सारी बिसारी है,
नबजिया वैद क्या देखे,
मुझे दिल की बीमारी है ||
असर करती नहीं कोई,
दवाई कीमती तेरी,
बिना दीदार दिलबर के,
मिटे नहीं बेकरारी है,
नबजिया वैद क्या देखे,
मुझे दिल की बीमारी है ||
अगर दीदार को मेरे,
मिलावे तू कभी मुझसे,
वो ब्रह्मानंद गुण तेरा,
करूँ मैं यादगारी है,
नबजिया वैद क्या देखे,
मुझे दिल की बीमारी है ||
नबजिया वैद क्या जाने,
मुझे दिल की बीमारी है ||
नबजिया वैद क्या जाने,
मुझे दिल की बीमारी है ||
नबजिया वैद क्या जाने,
मुझे दिल की बीमारी है ||
Nabjiya bed kya jane | muje dil ki bimari he | Gopal sadhu | OFFICIAL VIDEO | New Video 2023
दुनिया के वैद्य तो शरीर की बीमारियों का इलाज बताते हैं, कफ हो या गर्मी की तासीर, दवा देते रहते हैं। लेकिन दिल का दर्द कौन समझे? वो तो बस इश्वर के प्रेम में खोया हुआ होता है, जहाँ न चैन मिलता है न सुकून। साधक को लगता है जैसे कोई मोहिनी मूरत बस गई हो सीने के बीच में, सब कुछ भूल जाने को मजबूर कर दे। वैद्य की कीमती दवाइयाँ भी बेकारी मिटा न पाएँ, क्योंकि ये दर्द तो दीदार की प्यास से उपजा है। हमें सिखाते हैं कि असली शांति तो उसी प्रेमी के दर्शन में है, जो ब्रह्मानंद का गुण बरसाता है।
जब दिल में वो बसे, तो तन की हर खबर भूल जाती है, बस यादगारियाँ रह जाती हैं। वैद्य क्या जाने ये राज़, ये तो इश्वर का आशीर्वाद है जो हर पल साथ निभाता है। रोज़मर्रा की जिंदगी में भी ये प्रेम हमें जोड़े रखता है, छोटी-छोटी खुशियाँ बाँटता है। जैसे कोई अपना खींच ले दिल को अपनी ओर, वैसे ही ये बेकरारी मीठी लगने लगती है। आखिरकार, ये सब इश्वर की लीला है जो हमें करीब लाती है। आप सभी पर इश्वर की कृपा बनी रहे। जय श्री राधे जी! जय श्री कृष्ण जी!
जब दिल में वो बसे, तो तन की हर खबर भूल जाती है, बस यादगारियाँ रह जाती हैं। वैद्य क्या जाने ये राज़, ये तो इश्वर का आशीर्वाद है जो हर पल साथ निभाता है। रोज़मर्रा की जिंदगी में भी ये प्रेम हमें जोड़े रखता है, छोटी-छोटी खुशियाँ बाँटता है। जैसे कोई अपना खींच ले दिल को अपनी ओर, वैसे ही ये बेकरारी मीठी लगने लगती है। आखिरकार, ये सब इश्वर की लीला है जो हमें करीब लाती है। आप सभी पर इश्वर की कृपा बनी रहे। जय श्री राधे जी! जय श्री कृष्ण जी!
Gopalsadhu bhajansantvani