दातार लगाए पार मुझको जितनी भी दरकार

दातार लगाए पार मुझको जितनी भी दरकार

दातार लगाए पार,
मुझको जितनी भी दरकार,
मेरा पल पल साथ निभाए,
मेरा सांवरिया सरकार,
दातार लगाए पार,
मुझको जितनी भी दरकार।।

मेरा घर परिवार चलाए,
खुशियों के दीप जलाए,
बिन मांगे मेरा बाबा,
अनमोल रतन बरसाए,
सुमिरन भजनों भावों से,
मैं रोज करूं दीदार,
दातार लगाए पार,
मुझको जितनी भी दरकार।।

तक़दीर बनाने वाले,
बाबा से मिलाने वाले,
शुकराना तेरा दिल से,
खाटू ले जाने वाले,
जुग जुग जियो तुम प्यारे,
तेरा मौज करे परिवार,
दातार लगाए पार,
मुझको जितनी भी दरकार।।

कभी श्याम नाम की माला,
कभी जगमग ज्योत उजाला,
कभी शंख आरती गूंजे,
मन मंदिर बन गया आला,
मेरा तन मन झूमे ‘लहरी’,
क्यों फिकर करूं बेकार,
दातार लगाए पार,
मुझको जितनी भी दरकार।।

दातार लगाए पार,
मुझको जितनी भी दरकार,
मेरा पल पल साथ निभाए,
मेरा सांवरिया सरकार,
दातार लगाए पार,
मुझको जितनी भी दरकार।।


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Saroj Jangir Author Author - Saroj Jangir

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