भरी सभा में थाने मनाऊं कृष्णा भजन

भरी सभा में थाने मनाऊं कृष्णा भजन


आ जा भवानी वास कर,
मेरे घट के पट दे खोल,
रसना पर वासा करो,
मैया सुध शब्द मुख बोल।

भरी सभा में थाने मनाऊँ,
तू आ जाओ मात ज्वाला,
सिंह पे चढ़के आ जाओ भवानी,
लेके लंबा भाला माँ।

धौलागढ़ में भवन मात तेरा,
उँचा फहराके झंडा माँ,
दूर देशों से आवे जातरि,
लेकर झोली झंडा माँ,
चढ़ने चढ़ाव पान सुपारी,
बंटवाए हलवा मंडा माँ,
थारी शरण में मौज करे माँ,
भगत पुजारी पंडा माँ,
शंख और घंटियाल बजावे,
उँचा बने दिवाला,
सिंह पे चढ़के आ जाओ भवानी,
लेके लंबा भाला माँ।

इक दिन सुमिरि हनुमान ने,
लंका फूँक जलाई माँ,
जानी चौर माँ थाने सजवाके,
छत्रपाणी छुड़वायी माँ,
आला उतर थाने सजवाके,
बावन लड़ी लड़ाई माँ,
जगह जगह पर भवन मात तेरा,
घर घर में पूजवायी माँ,
पल्लू में है माँ ब्राह्मणी,
गल पुष्पों की माला माँ,
सिंह पे चढ़के आ जाओ भवानी,
लेके लंबा भाला माँ।

बावन भैरूं चौसठ जोगिणी,
संग में लेकर आइये माँ,
भक्त खड़े थारे मंदिर में,
आके दर्शन दिखाइये माँ,
बांई भुजा पर बैठ भवानी,
ज्ञान की ज्योत जगाइये माँ,
मेरे हृदय की खोल कीवाड़ी,
ताल कंठ दर्शन दिखाइये माँ,
ज्ञान ध्यान की ज्योत जगाकर,
कर घट में उजियाला,
सिंह पे चढ़के आ जाओ भवानी,
लेके लंबा भाला माँ।

दंगल में आए बिन मैया,
मेरा काम सरे ना माँ,
एक काम मेरा सिद्ध नहीं होता,
जब तक महर करे ना माँ,
जिस पर हो जाए महर आपकी,
वो नर कभी डरे ना माँ,
छबीलदास मैया थारे भजन बिना,
गाना शुरू करे ना माँ,
खुश होकर थारी करूँ बड़ाई,
हरगिज करूँ ना टाला,
सिंह पे चढ़के आ जाओ भवानी,
लेके लंबा भाला माँ।



!! आजा मात भवानी!! पवन शर्मा!! #newbhajan #pawansharma

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आय भवानी घट के पट खोलकर वास करो, रसना पर बसाकर सुध शब्द बोलो। भरी सभा में थाने मनाते सिंग पर चढ़ी ज्वाला रूप वाली लंबा भाला थामे आओ। धौलागढ़ भवन में ऊंचा झंडा फहराता, दूर देशों से जातरियां झोली लेकर आतीं, चढ़ने चढ़ाव पान सुपारी बंटती। शंख घड़ियाल बाजते दिवाला उंचा होता, भगत पुजारी मौज मनाते। सुमरी हनुमान लंका फूंकी, छतराणी छुड़वाई बावन लड़ी लड़ाई में। पल्लू में ब्रह्माणी गले पुष्पमाला लिए। माँ भवानी का महात्म्य अपार है, बावन भैरूं चौसट जोगणी संग दर्शन देकर ज्ञान ज्योत जगातीं। दंगल में बिना आए काम न सिद्ध होते, महर से भक्त डर निभाते। छबीलदास भजन गाकर खुश हो बड़ाई करते, हृदय खौल किवाड़ ताल कंठ दिखातीं। थाने सिंवरकर जग जगह पूजित होकर शरणागत को विजय प्रदान करतीं।
 
Saroj Jangir Author Author - Saroj Jangir

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