म्हारे जागरण में आईये तेरी जोत जगाई री

म्हारे जागरण में आईये तेरी जोत जगाई री

म्हारे जागरण में आईये,
तेरी जोत जगाई री,
हलवे का प्रसाद बणाया,
देबी माई री।।

सुंदर सा दरबार री मईया,
भक्तों ने सजाया,
श्रद्धा से भक्तों ने मईया,
फूलों का हार बणाया,
मनमोहक रूप बणाया,
मनमोहक रूप बणाया,
चुंदड़ी लाल उड़ाई री,
हलवे का प्रसाद बणाया,
देबी माई री।।

भक्त~भक्तणि मिल क,
दर तेरे प आए,
ध्वजा नारियल फल मेवा,
माँ तेरी भेंट चढ़ाए हैं,
कोई नाच रहा कोई गाए,
कोई नाच रहा कोई गाए,
भवन में धूम मचाई री,
हलवे का प्रसाद बणाया,
देबी माई री।।

कोए पुकारे जगदंबे,
कोई कहता पहाड़ों वाली,
वैष्णो माता कह क बोले,
कोए कहता गुड़गाँवे आली,
बैरी भनभौरी आली,
बैरी भनभौरी आली,
तन्नै मनसा माई री,
हलवे का प्रसाद बणाया,
देबी माई री।।

गुरु दयाचंद भी श्याम~सवेरी,
जपता तेरी माला,
कोयल की ज्यूँ भजन सुणा क,
टोनी करे उजाला,
राम भक्त श्यामड़ी आला,
राम भक्त श्यामड़ी आला,
करता कविताई री,
हलवे का प्रसाद बणाया,
देबी माई री।।

म्हारे जागरण में आईये,
तेरी जोत जगाई री,
हलवे का प्रसाद बणाया,
देबी माई री।।



MAHRE JAGRAN ME AAYE TERI JYOT JAGAI" NARENDER KAUSHIK"

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Saroj Jangir Author Admin - Saroj Jangir

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