जिसके नाथ साई नाथ वो अनाथ कैसे होगा
जिसके नाथ साई नाथ वो अनाथ कैसे होगा
जिसके नाथ साईं नाथ, वो अनाथ कैसे होगा,
अनाथ कैसे होगा, वो अनाथ कैसे होगा।
साईं चाह लेंगे दिन, तो फिर रात कैसे होगा।।
शिरडी सबके मन को भाये,
जिसको भुलाये साईं, वही यहाँ आये,
साईं कर देंगे आबाद, तो बर्बाद कैसे होगा,
जिसके नाथ साईं नाथ, वो अनाथ कैसे होगा।।
मन जब साईं में रम जायेगा,
ग़म का बादल यूँ छँट जायेगा,
साईं प्यार की सौगात में आघात कैसे होगा,
जिसके नाथ साईं नाथ, वो अनाथ कैसे होगा।।
अनाथ कैसे होगा, वो अनाथ कैसे होगा।
साईं चाह लेंगे दिन, तो फिर रात कैसे होगा।।
शिरडी सबके मन को भाये,
जिसको भुलाये साईं, वही यहाँ आये,
साईं कर देंगे आबाद, तो बर्बाद कैसे होगा,
जिसके नाथ साईं नाथ, वो अनाथ कैसे होगा।।
मन जब साईं में रम जायेगा,
ग़म का बादल यूँ छँट जायेगा,
साईं प्यार की सौगात में आघात कैसे होगा,
जिसके नाथ साईं नाथ, वो अनाथ कैसे होगा।।
Jiske Nath Sai Nath [Full Song] Jiske Nath Sainath Wo Anath Kaise Hoga
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Bhajan: Jiske Nath Sainath
Singer: Anil Bawra
Music Director: Rajesh Gupta
Lyricist: Anil Bawra
Album: Jiske Nath Sainath Wo Anath Kaise Hoga
Music Label: T-Series
Singer: Anil Bawra
Music Director: Rajesh Gupta
Lyricist: Anil Bawra
Album: Jiske Nath Sainath Wo Anath Kaise Hoga
Music Label: T-Series
जब किसी का जीवन सच्चे प्रेम, आस्था और समर्पण से किसी दिव्य शक्ति से जुड़ जाता है, तो उसके भीतर से अकेलेपन और असुरक्षा की भावना स्वतः समाप्त हो जाती है। ऐसा व्यक्ति कभी भी अपने को अनाथ या असहाय नहीं मानता, क्योंकि उसे यह गहरा विश्वास होता है कि कोई दयालु, सर्वशक्तिमान शक्ति सदा उसके साथ है। यह विश्वास जीवन के हर उतार-चढ़ाव में उसे संबल और साहस देता है। जब मन पूरी तरह से अपने आराध्य में रम जाता है, तो दुःख, भय और निराशा के बादल छँट जाते हैं, और जीवन में आशा, प्रेम और ऊर्जा का संचार होने लगता है।
दिव्य कृपा का अनुभव करने वाला व्यक्ति जानता है कि उसकी हर आवश्यकता, हर समस्या और हर दुख का समाधान उस शक्ति के पास है, जिससे उसका संबंध है। जब मनुष्य अपने जीवन को पूरी तरह से उस दयालु शक्ति के हवाले कर देता है, तो उसके जीवन में स्थिरता, संतुलन और आनंद आ जाता है। प्रेम और विश्वास की यह सौगात उसे हर परिस्थिति में मजबूत बनाती है, और वह हर कठिनाई में भी खुद को सुरक्षित और समर्थ महसूस करता है। यही वह भाव है, जिसमें सच्चा सहारा, अपनापन और आत्मिक सुख छुपा है—और यही अनुभव जीवन को पूर्णता और आनंद से भर देता है।
दिव्य कृपा का अनुभव करने वाला व्यक्ति जानता है कि उसकी हर आवश्यकता, हर समस्या और हर दुख का समाधान उस शक्ति के पास है, जिससे उसका संबंध है। जब मनुष्य अपने जीवन को पूरी तरह से उस दयालु शक्ति के हवाले कर देता है, तो उसके जीवन में स्थिरता, संतुलन और आनंद आ जाता है। प्रेम और विश्वास की यह सौगात उसे हर परिस्थिति में मजबूत बनाती है, और वह हर कठिनाई में भी खुद को सुरक्षित और समर्थ महसूस करता है। यही वह भाव है, जिसमें सच्चा सहारा, अपनापन और आत्मिक सुख छुपा है—और यही अनुभव जीवन को पूर्णता और आनंद से भर देता है।
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Author - Saroj Jangir
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