फूल्या की बाई मरगी रे पंचा ने लाडू भावे भजन
फूल्या की बाई मरगी रे पंचा ने लाडू भावे भजन
फूल्या की बाई मरगी रे,
पंचा ने लाडू भावे।।
बीमारी में बाबा हो गयो,
नोट कटां सूँ आवे,
आखिर बाई को जीव निकल गयो,
दूणां घबरावे,
फूल्या की बाई मरगी रे,
पंचा ने लाडू भावे।।
धबड़-धबड़ तो बाई बले,
नाई राच ले आवे,
घटे जो तो हजामत कर दे,
चोटी ने राम बचावे,
फूल्या की बाई मरगी रे,
पंचा ने लाडू भावे।।
आप-पास का गाँव का जो,
सुणे बैठ बा आवे,
बीड़ी जेब सूँ काढ़े कोयने,
धामां पे नज़र फैलावे,
फूल्या की बाई मरगी रे,
पंचा ने लाडू भावे।।
वाके मरग्या… वाके मरग्या…
यूँ-यूँ के समझावे,
उबा गेहूं ने गेणे मांड दे,
शक्कर की बोरिया लावे,
फूल्या की बाई मरगी रे,
पंचा ने लाडू भावे।।
बणा पाँच पकवान भाई रे,
पचे जिम्बा जावे,
खेत-कूड़ा तो गेणे मंडग्या,
तोई खेते मेलवा जावे,
फूल्या की बाई मरगी रे,
पंचा ने लाडू भावे।।
मृत्यु-भोज ने बंद करो तो,
मौको फेर नहीं आवे,
ई बगत भी काई न होयो,
ओंकारो कहे समझावे,
फूल्या की बाई मरगी रे,
पंचा ने लाडू भावे।।
फूल्या की बाई मरगी रे,
पंचा ने लाडू भावे।।
पंचा ने लाडू भावे।।
बीमारी में बाबा हो गयो,
नोट कटां सूँ आवे,
आखिर बाई को जीव निकल गयो,
दूणां घबरावे,
फूल्या की बाई मरगी रे,
पंचा ने लाडू भावे।।
धबड़-धबड़ तो बाई बले,
नाई राच ले आवे,
घटे जो तो हजामत कर दे,
चोटी ने राम बचावे,
फूल्या की बाई मरगी रे,
पंचा ने लाडू भावे।।
आप-पास का गाँव का जो,
सुणे बैठ बा आवे,
बीड़ी जेब सूँ काढ़े कोयने,
धामां पे नज़र फैलावे,
फूल्या की बाई मरगी रे,
पंचा ने लाडू भावे।।
वाके मरग्या… वाके मरग्या…
यूँ-यूँ के समझावे,
उबा गेहूं ने गेणे मांड दे,
शक्कर की बोरिया लावे,
फूल्या की बाई मरगी रे,
पंचा ने लाडू भावे।।
बणा पाँच पकवान भाई रे,
पचे जिम्बा जावे,
खेत-कूड़ा तो गेणे मंडग्या,
तोई खेते मेलवा जावे,
फूल्या की बाई मरगी रे,
पंचा ने लाडू भावे।।
मृत्यु-भोज ने बंद करो तो,
मौको फेर नहीं आवे,
ई बगत भी काई न होयो,
ओंकारो कहे समझावे,
फूल्या की बाई मरगी रे,
पंचा ने लाडू भावे।।
फूल्या की बाई मरगी रे,
पंचा ने लाडू भावे।।
फुल्या की बाई मरगी पंचा ने लाडु भावे !! 9672116398 || Champa lal Prajapati !! Pancha ne ladu Bhave
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फूल्या की बाई मरने पर पंचा को लाडू भाए, बीमारी में नोट कटवाए जीव निकल घबराहट आई। धबड़ धबड़ बाई बली नाई राच ले आई, हजामत चोटी राम बचावे। पास गांव वाले सुने बैठे बीड़ी काड़ नजर फैलावे। वाके मरग्या समझावे उबा गेहूं शक्कर बोरिया लावे। पकवान बना पचे जिम्बा खेत मंडग्या मेंलवा जावे। मृत्यु भोज बंद करो मौका न आवे, बगत न होय ओंकार समझावे। हे भोले बाबा, तुम मृत्यु भोज के बीच भी भक्तों को लाडू वितरण कराने वाले हो और गांव की रस्में निभाते हो। लोक भक्ति के स्वामी, तुम्हारी लीला से नाई हजामत चोटी बचावे, पंचा लाडू भोग लगावे। समझावे से बगत टल जाती, हे महादेव, जीवन मृत्यु सब तुम्हारे हाथ में है।
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Author - Saroj Jangir
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