हिरदा में बोल आ जाए जगदम्बा भजन

हिरदा में बोल आ जाए जगदम्बा भजन

हिरदा में बोल आ जाए,
जगदम्बा अम्बा सरस्वती,
नादिया पर भोला बैठ्यो,
सिंह पर बैठी पार्वती।।

ऋद्धि~सिद्धि का दाता री,
सब देवा का गणदेवपति,
सब देवा का राजा इन्द्र~राजा,
हाथी पर चल रही शची,
हिरदा में बोल आ जाए,
जगदम्बा अम्बा सरस्वती।।

पवनपुत्र अंजनी का लाला,
आ जा रे हनुमान जती,
रामचन्द्र सो राजा कौन,
सीता सी कोई नहीं सती,
हिरदा में बोल आ जाए,
जगदम्बा अम्बा सरस्वती।।

ईश्वर सब ने देख रह्यो छ,
खबर छुपी नहीं रत्ती,
ई भारत की धरती पर,
कितरी माताजी या देख मती,
हिरदा में बोल आ जाए,
जगदम्बा अम्बा सरस्वती।।

बैकुण्ठ में विष्णु बैठ्या,
कैलाशा कैलाशपति,
ब्रह्मलोक ब्रह्मा जी,
या तीना की एक मति,
हिरदा में बोल आ जाए,
जगदम्बा अम्बा सरस्वती।।

गुरु कर भगवान सहाय,
न बड़ा~बड़ा करोड़पति,
म्हारे गुरु की कृपा सूँ या लल्या,
पंज्याँ की नहीं चली,
हिरदा में बोल आ जाए,
जगदम्बा अम्बा सरस्वती।।

हिरदा में बोल आ जाए,
जगदम्बा अम्बा सरस्वती,
नादिया पर भोला बैठ्यो,
सिंह पर बैठी पार्वती।।



माताजी भजन-हिरदा म बोल आजाये जगदम्बा अम्बा सरस्वती

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Saroj Jangir Author Admin - Saroj Jangir

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