मेरा रंग दे बसंती चोला देशभक्ति सोंग मीनिंग
"मेरा रंग दे बसंती चोला" भजन २००२ में रिलीज़ हुई फिल्म "द लीजेंड ऑफ भगत सिंह" से लिया गया है। इस फिल्म का निर्देशन प्रसिद्ध निर्देशक राजकुमार संतोषी ने किया, जो भगत सिंह के जीवन पर आधारित एक प्रेरणादायी बायोपिक है।
फिल्म में अजय देवगण ने भगत सिंह की मुख्य भूमिका निभाई, जबकि सुशांत सिंह (सुखदेव), डी. संतोष (राजगुरु), अखिलेंद्र मिश्रा (चंद्रशेखर आज़ाद), अमृता राव, राज बब्बर और फरीदा जलाल ने महत्वपूर्ण सहायक भूमिकाएँ निभाईं। संगीत ए.आर. रहमान ने दिया, जिसमें "मेरा रंग दे बसंती चोला" और "सर्फरोशी की तमन्ना" जैसे अमर गीत शामिल हैं
फिल्म में अजय देवगण ने भगत सिंह की मुख्य भूमिका निभाई, जबकि सुशांत सिंह (सुखदेव), डी. संतोष (राजगुरु), अखिलेंद्र मिश्रा (चंद्रशेखर आज़ाद), अमृता राव, राज बब्बर और फरीदा जलाल ने महत्वपूर्ण सहायक भूमिकाएँ निभाईं। संगीत ए.आर. रहमान ने दिया, जिसमें "मेरा रंग दे बसंती चोला" और "सर्फरोशी की तमन्ना" जैसे अमर गीत शामिल हैं
Mera Rang De Basanti Chola Meaning
मेरा रंग दे बसंती चोला,हो आज रंग दे,
हो माँ ऐ रंग दे,
मेरा रंग दे बसंती चोला।
आज़ादी को चली ब्याहने,
दीवानों की टोलियां,
खून से अपने लिखे देंगे,
हम इंक़लाब की बोलियां,
हम वापस लौटेंगे,
लेकर आजादी का डोला,
मेरा रंग दे बसंती चोला,
हो आज रंग दे,
हो माँ ऐ रंग दे,
मेरा रंग दे बसंती चोला।
ये वो चोला है,
के जिस पे रंग ना चढ़े दूजा,
हमने तो बचपन से,
की थी इस चोले की पूजा,
कल तक जो चिंगारी थी,
वो आज बनी है शोला,
मेरा रंग दे बसंती चोला,
हो आज रंग दे,
हो माँ ऐ रंग दे,
मेरा रंग दे बसंती चोला।
सपनें में देखा था जिसको,
आज वही दिन आया है,
सूली के उस पार खड़ी है,
माँ ने हमें बुलाया है,
आज मौत के पलड़े में,
जीवन को हमने तौला,
मेरा रंग दे बसंती चोला,
हो आज रंग दे,
हो माँ ऐ रंग दे,
मेरा रंग दे बसंती चोला।
मेरा रंग दे बसंती चोला,
हो आज रंग दे,
हो माँ ऐ रंग दे,
मेरा रंग दे बसंती चोला।
Mera Rang De Basanti Chola Meaning
मेरा रंग दे बसंती चोला: "Mera Rang De Basanti Chola" means "O Basanti, color my attire with the hue of saffron (a color often associated with sacrifice and patriotism)."हो आज रंग दे, हो माँ ऐ रंग दे: "Ho aaj rang de, ho Maa ai rang de" means "Today, please color me, oh mother (India), with the hue of saffron."
आज़ादी को चली ब्याहने: "Azadi ko chali byahane" means "To get freedom married."
दीवानों की टोलियां: "Deewano ki toliyan" means "The group of crazy (or passionate) people."
खून से अपने लिखे देंगे: "Khoon se apne likhe denge" means "We will write our destiny with our own blood."
हम इंक़लाब की बोलियां: "Hum inqalab ki boliyan" means "We speak the language of revolution."
हम वापस लौटेंगे, लेकर आजादी का डोला: "Hum wapas lautenge, lekar azaadi ka dola" means "We will come back, carrying the chariot of freedom."
ये वो चोला है, के जिस पे रंग ना चढ़े दूजा: "Ye wo chola hai, ke jis pe rang na chadhe dooja" means "This is the dress on which no other color can be put."
हमने तो बचपन से की थी इस चोले की पूजा: "Humne to bachpan se ki thi is chole ki puja" means "We have been worshipping this dress since childhood."
कल तक जो चिंगारी थी, वो आज बनी है शोला: "Kal tak jo chingari thi, wo aaj bani hai shola" means "The spark that was until yesterday has turned into a flame today."
सपनें में देखा था जिसको, आज वही दिन आया है: "Sapne mein dekha tha jisko, aaj wahi din aaya hai" means "The day we had dreamt of has come today."
सूली के उस पार खड़ी है, माँ ने हमें बुलाया है: "Sooli ke us paar khadi hai, Maa ne hamein bulaya hai" means "Over there, beyond the gallows, mother (India) is calling us."
About The Movie "The Legend of Bhagat Singh"
"The Legend of Bhagat Singh" is a Hindi-language biographical film directed by Rajkumar Santoshi and released in 2002. The film tells the story of the legendary Indian freedom fighter Bhagat Singh, who played a pivotal role in the Indian independence movement against British colonialism. The film stars Ajay Devgn in the lead role as Bhagat Singh, along with Sushant Singh, D. Santosh, and Akhilendra Mishra in supporting roles.Mera Rang De Basanti "द लीजेंड ऑफ भगत सिंह" (२००२) फिल्म के भजन "मेरा रंग दे बसंती चोला" के बोल प्रसिद्ध गीतकार समीर अंजान ने लिखे। समीर, जिनका असली नाम शीतला पांडे है, का जन्म २४ फरवरी १९५८ को वाराणसी में हुआ। उन्होंने ५०० से अधिक बॉलीवुड फिल्मों के लिए ४००० से ज्यादा गीत लिखे।
समीर को गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड्स में सबसे अधिक गीत लिखने के लिए सम्मानित किया गया। उन्होंने तीन फिल्मफेयर पुरस्कार जीते, जिनमें "आशिकी" का "नजर के सामने" शामिल है। अन्य लोकप्रिय गीत जैसे "तुम पास आए" ("कुछ कुछ होता है") और "तुझे देखा तो ये जाना सनम" ("दिलवाले दुल्हनिया ले जाएंगे") उनकी काव्यात्मक प्रतिभा दर्शाते हैं। पिता आंजन के प्रभाव में समीर ने सरल और हृदयस्पर्शी बोल लिखे। वे नादिम-श्रवण, ए.आर. रहमान जैसे संगीतकारों संग कार्यरत रहे। उनकी रचनाएँ आज भी प्रासंगिक हैं।
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