गुण की कदर गुणी नर जाने भजन
गुण की कदर गुणी नर जाने भजन
गुण की कदर गुणी नर जाने,
मूरख बक-बक करया करे,
दूध और पानी को न्यारा,
हंस छांट के धरया करे।।
कदरदार की कदर जगत में,
कदर करणियां करया करे,
चुगलखोर बेईमान आदमी,
यों ही जल-जल मरया करे,
हाथी लारे हजारों कुत्ते,
यों ही घूमता फिरया करे,
दुब-खूब की खूब जगत में,
लाखों घोड़ा चरया करे,
चुगलखोर चंडाल आदमी,
डींग हांकता फिरया करे,
दूध और पानी को न्यारा,
हंस छांट के धरया करे।
मन में मूरख दुखी जण में,
कोई भी ना मिल्या करे,
आधे सेर बर्तन के अंदर,
सवा सेर ना घल्या करे,
जिस पर हो परमेश्वर राजी,
दुश्मन की ना चल्या करे,
वक्त पड़े बिना भले-बुरे का,
असल भेद ना चल्या करे,
साहुकार निडर हो डोले,
चोर लुटेरा डरया करे,
दूध और पानी को न्यारा,
हंस छांट के धरया करे।
जुल्म-ज्यादती ज्यादा दिन तक,
ना किसी की टिक्या करे,
बेईमानी का घोड़ा जाके,
रणभूमि में धक्या करे,
मूरख नर सत्संग में जाकर,
थोथा बक-बक बक्या करे,
कपटी और बेईमान आदमी,
पीर पराई तक्या करे,
संतोषी नर सुखी रहें नित,
मूरख पच-पच मरया करे,
दूध और पानी को न्यारा,
हंस छांट के धरया करे।
कंचन काट कदे ना लागे,
कीचड़ बीच धरो चाहे,
कुरड़ी के बिन गधा रंजे ना,
नागर बैल चरो चाहे,
बाण-कुबाण मूरख ना छोड़े,
कितना प्रेम करो चाहे,
गुरु मिले रघुनाथ जगत में,
निर्भय हो फिरो चाहे,
हरीनारायण शर्मा कहता,
भजन करणियां तिरया करे,
दूध और पानी को न्यारा,
हंस छांट के धरया करे।
गुण की कदर गुणी नर जाने,
मूरख बक-बक करया करे,
दूध और पानी को न्यारा,
हंस छांट के धरया करे।।
मूरख बक-बक करया करे,
दूध और पानी को न्यारा,
हंस छांट के धरया करे।।
कदरदार की कदर जगत में,
कदर करणियां करया करे,
चुगलखोर बेईमान आदमी,
यों ही जल-जल मरया करे,
हाथी लारे हजारों कुत्ते,
यों ही घूमता फिरया करे,
दुब-खूब की खूब जगत में,
लाखों घोड़ा चरया करे,
चुगलखोर चंडाल आदमी,
डींग हांकता फिरया करे,
दूध और पानी को न्यारा,
हंस छांट के धरया करे।
मन में मूरख दुखी जण में,
कोई भी ना मिल्या करे,
आधे सेर बर्तन के अंदर,
सवा सेर ना घल्या करे,
जिस पर हो परमेश्वर राजी,
दुश्मन की ना चल्या करे,
वक्त पड़े बिना भले-बुरे का,
असल भेद ना चल्या करे,
साहुकार निडर हो डोले,
चोर लुटेरा डरया करे,
दूध और पानी को न्यारा,
हंस छांट के धरया करे।
जुल्म-ज्यादती ज्यादा दिन तक,
ना किसी की टिक्या करे,
बेईमानी का घोड़ा जाके,
रणभूमि में धक्या करे,
मूरख नर सत्संग में जाकर,
थोथा बक-बक बक्या करे,
कपटी और बेईमान आदमी,
पीर पराई तक्या करे,
संतोषी नर सुखी रहें नित,
मूरख पच-पच मरया करे,
दूध और पानी को न्यारा,
हंस छांट के धरया करे।
कंचन काट कदे ना लागे,
कीचड़ बीच धरो चाहे,
कुरड़ी के बिन गधा रंजे ना,
नागर बैल चरो चाहे,
बाण-कुबाण मूरख ना छोड़े,
कितना प्रेम करो चाहे,
गुरु मिले रघुनाथ जगत में,
निर्भय हो फिरो चाहे,
हरीनारायण शर्मा कहता,
भजन करणियां तिरया करे,
दूध और पानी को न्यारा,
हंस छांट के धरया करे।
गुण की कदर गुणी नर जाने,
मूरख बक-बक करया करे,
दूध और पानी को न्यारा,
हंस छांट के धरया करे।।
विशाल सिंह कविया द्वारा गुणी की कदर गुणी नर जाणे प्रोग्राम दांतला RSS DANTA
ऐसे ही अन्य भजनों के लिए आप होम पेज / गायक कलाकार के अनुसार भजनों को ढूंढें.
पसंदीदा गायकों के भजन खोजने के लिए यहाँ क्लिक करें।
ऐसे ही अन्य भजनों के लिए आप होम पेज / गायक कलाकार के अनुसार भजनों को ढूंढें.
पसंदीदा गायकों के भजन खोजने के लिए यहाँ क्लिक करें।
तेरेमें जो सच्चा गुण है, वह धूप की तरह धीरे-धीरे दिखता है; समझदार उसकी चमक पहचान लेता है, पर मूरख की हुंकार सिर्फ़ शोर ही बढ़ाती है। दुनिया के फरेबी-शोर में असली और नकली का फर्क वही जान पाता है जो अनुभव से परखा हो—दूध और पानी का फ़र्क़ उसी तरह साफ़ हो जाता है जैसे हंस छलनी कर के शुद्ध दूध पकड़ लेता है। जितने भी कपटी बोलते हैं, उनकी ढाँची शीघ्र ही ढह जाती है; वहीं सान्त्वना और संतोष में जिए हुए मन की सादगी में सच्ची शक्ति रहती है। जब समय आता है तो बेईमानी के ऊँचे-ऊँचे डंके खुद ही टूट जाते हैं और ईमानदारी का मृदु साहस सामने आ जाता है। इसलिए वैसा करि जहाँ गुण हो—बाहर के घूँटों से ज्यादा, भीतर की शुद्धता की कदर कर; वही जीवन को टिकाऊ, सरल और सुकूनभरा बनाती है।
विशाल सिंह कविया द्वारा गुणी की कदर गुणी नर जाणे प्रोग्राम दांतला RSS DANTA / प्रोग्राम रावत परिवार दांतला बाय में
यह भजन भी देखिये
|
Author - Saroj Jangir
इस ब्लॉग पर आप पायेंगे मधुर और सुन्दर कृष्णा भजन, जन्माष्टमी भजन, भजनों का संग्रह । इस ब्लॉग का उद्देश्य आपको सुन्दर भजनों के बोल/Lyrics उपलब्ध करवाना है। आप इस ब्लॉग पर अपने पसंद के गायक और भजन केटेगरी के भजन खोज सकते हैं....अधिक पढ़ें। |
