ओ मेरी मैया वांकुल रखवाली भजन
ओ मेरी मैया वांकुल रखवाली भजन
ओ मेरी मैया वांकुल रखवाली,
धाम वीराना है भारी॥
ऊंचा डूंगर पे भवन बनाया,
नीचे मां बाजार लगायो।
नगरी में माता सजे भारी,
धाम वीराना है भारी॥
अंबर वरणी ओढ़े चुनरी,
दीन-दयाली मंगल करणी।
ओ मैया नंदरीश कुल रखवाली,
धाम वीराना है भारी॥
ढोल-नगाड़ा नौपत बाजे,
जोत अखंडी जय-जय गाजे।
पतझड़ ने कर दे हरियाली,
धाम वीराना है भारी॥
सुख री कर दे या छाया,
दया रुपाली महामाया।
काटे दुखड़ा, रोग देवे टाली,
धाम वीराना है भारी॥
नंदवाना सब करता सेवा,
टाबर पाता कृपा मेवा।
या सुरेश ने है तारण वाली,
नंदरीश कुल रखवाली॥
ओ मेरी मैया वांकुल रखवाली,
धाम वीराना है भारी॥
धाम वीराना है भारी॥
ऊंचा डूंगर पे भवन बनाया,
नीचे मां बाजार लगायो।
नगरी में माता सजे भारी,
धाम वीराना है भारी॥
अंबर वरणी ओढ़े चुनरी,
दीन-दयाली मंगल करणी।
ओ मैया नंदरीश कुल रखवाली,
धाम वीराना है भारी॥
ढोल-नगाड़ा नौपत बाजे,
जोत अखंडी जय-जय गाजे।
पतझड़ ने कर दे हरियाली,
धाम वीराना है भारी॥
सुख री कर दे या छाया,
दया रुपाली महामाया।
काटे दुखड़ा, रोग देवे टाली,
धाम वीराना है भारी॥
नंदवाना सब करता सेवा,
टाबर पाता कृपा मेवा।
या सुरेश ने है तारण वाली,
नंदरीश कुल रखवाली॥
ओ मेरी मैया वांकुल रखवाली,
धाम वीराना है भारी॥
ओ मेरी मैया वांकल रखवाली।। O Meri Maiya Vankal Rakhavali ।। Singer Vishwas Nandwana।। MNP
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तेरी वन्दना सुनते ही धमनियों में एक मीठी थिरकन उठती है; धाम का वीरान होना भी तेरे नाम से भर जाने पर एक अनकही पावनता में बदल जाता है। ऊँचे डूंगर पर तेरा भवन मानो आकाश से जुड़ा दीप है, और नीचे लगी मण्डियाँ तेरे आँगन की रौनक होने पर भी तेरे बिना सूनी सी लगती हैं। तेरी ओढ़नी ने अंबर को भी निहाल कर दिया है; तेरी दया की छाया में हर पतझड़ हरा-भरा हो उठता है और दुःखों की झड़ियाँ फूल बन जाती हैं। ढोल-नगाड़ों की गूँज और अखंड ज्योत की चमक में तेरी ममता हर तार-तार में बज उठती है; तेरी करुणा ने ही नंदवाना को सेवा का मञ्च बनाया और बच्चों के चेहरों पर अनन्त प्रसन्नता की ज्योति जगा दी। तू जो साथ हो तो वीरानी भी महफूज़ घर बनकर लगती है—एक ऐसी गोद जहां सब कष्ट कटते हैं और जीवन का हर रंग दया के ताप में निखर उठता है।
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Author - Saroj Jangir
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