सतगुरु मेरे दाता बिगड़ी संवार दे भजन

सतगुरु मेरे दाता बिगड़ी संवार दे भजन

 
सतगुरु मेरे दाता बिगड़ी संवार दे Satguru Mere Data Lyrics

सतगुरु मेरे दाता,
बिगड़ी संवार दे,
डूबी है नैया मेरी,
सागर से तार दे,
सतगुरु मेरे दाता,
बिगड़ी संवार दे,
डूबी है नैया मेरी,
सागर से तार दे।

जन्मों से दुख पाया,
माया में रच कर,
भगती तेरी को भूला,
विषयों में फस कर,
कृपा से अपनी,
सब दुखड़े निवार दे,
सतगुरु मेरे दाता,
बिगड़ी संवार दे,
डूबी है नैया मेरी,
सागर से तार दे।

अज्ञानी जीव हूं मैं,
कुछ भी ना जानूं,
अपनी ना लाभ हानि,
बिलकुल ना जानूं,
नेकी बदी का प्रभु,
मुझको विचार दे,
सतगुरु मेरे दाता,
बिगड़ी संवार दे,
डूबी है नैया मेरी,
सागर से तार दे।

दुनिया की चतुराई,
थोथी है सारी,
मान बढाई दौलत,
मुझको ना प्यारी,
चाहा यही है अपने,
चरणों का प्यार दे,
सतगुरु मेरे दाता,
बिगड़ी संवार दे,
डूबी है नैया मेरी,
सागर से तार दे।

तन मन मेरे,
तेरे प्रेम में रंग जाये,
उतरे कभी ना दिल से,
ये बस उमंग जाये
दास को भक्ति का,
ऐसा खुमार दे,
सतगुरु मेरे दाता,
बिगड़ी संवार दे,
डूबी है नैया मेरी,
सागर से तार दे।


SSDN Bhajan ।। सतगुरु मेरे दाता बिगड़ी संवार दे।। lyrics in Description

हे सतगुरु मेरे दाता, बिगड़ी हुई दशा संवार दे, डूबी नैया को माया के सागर से पार लगा दे—जन्मों से दुख भोगे, भक्ति भूलकर विषयों में फँस गया, अपनी कृपा से सारे दुख निवारित कर; अज्ञानी जीव हूँ, लाभ-हानि-नेकी-बदी कुछ नहीं जानता, विवेक दे; दुनिया की चतुराई-अभिमान-धन व्यर्थ हैं, बस चरणों का प्रेम दे; तन-मन तेरे प्रेम में रंग जाएँ, दिल से कभी न उतरे ऐसी उमंग भरे, दास को भक्ति का गहरा खुमार दे—यह भक्त की करुणा-पूर्ण प्रार्थना है सतगुरु से समर्पण और मोक्ष के लिए।

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