बाला जी मोसे यू बोले तने मालामाल करा भजन
बाला जी मोसे यू बोले तने मालामाल करा भजन
बढ़िया सी तेरी कोठी बनवा दूं,शीशे की वा में खिड़की लगवा दूं,
फिर बाबा यू बोले यू बोले,
मेरा मीठा मीठा भोग,
बाला जी मोसे यू बोले यू बोले,
तने मालामाल करा दूं।
तेरे अंगना में भूरी भैंस बंधा दूं,
दूध दही की मौज करा दूं,
फिर बाबा यू बोले यू बोले,
मेरी देसी घी की ज्योत,
बाला जी मोसे यू बोले यू बोले,
तने मालामाल करा दूं।
तेरे बेटे की नौकरी लगा दूं,
हर महीने उसकी तनखा बढ़ा दूं,
फिर बाबा यू बोले यू बोले,
मेरा सवामणि का भोग,
बाला जी मोसे यू बोले यू बोले,
तने मालामाल करा दूं।
बढ़िया सी तेरी कोठी बनवा दूं,
शीशे की वा में खिड़की लगवा दूं,
फिर बाबा यू बोले यू बोले,
मेरा मीठा मीठा भोग,
बाला जी मोसे यू बोले यू बोले,
तने मालामाल करा दूं।
#HANUMANJAYANTISPECIAL || बालाजी मोसे यु बोले || BALAJI MOSE YU BOLE ||
जीवन में चाहत और अरमान अक्सर सरल सुखों से जुड़ते हैं — एक सुंदर घर, आरामदेह ज़िंदगी, और घर की खुशहाली। जब कोई स्नेहपूर्वक यह वांछा करता है कि जीवन में सुविधा और समृद्धि आ जाएँ, तो वह चाह सीधे दिल से निकलती है: अपने परिवारीजनों के लिए सुरक्षित छत, हर रोज़ के सुख-आराम और घर के आंगन में समृद्धि की चमक। ऐसे संकल्प में उम्मीद और देखभाल दोनों होते हैं; यह दिखता है कि सुख केवल निजी आनंद नहीं, बल्कि परिवार की भलाई और आने वाली पीढ़ियों की तरक्की के लिए भी चाहा जाता है।
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