बोले शंकर गौरा जी से हम भी जनानी बनेंगे भजन
बोले शंकर गौरा जी से हम भी जनानी बनेंगे भजन
बोले शंकर,बोले शंकर गौरा जी से एक दिन,
प्यारी हम भी जनानी बनेंगे,
बनेंगे प्यारी हम भी जनानी बनेंगे,
वृंदावन की,
वृंदावन की सुहानी गली में,
देखने रासलीला चलेंगे,
चलेंगे देखने रासलीला चलेंगे।
बोली गौरा सुनो त्रिपुरारी,
अक्ल गुम हो गई क्या तुम्हारी,
मर्द से बन रहे हो जनानी,
और कहते हो हम भी चलेंगे,
चलेंगे और कहते हो,
हम भी चलेंगे,
वृंदावन की,
वृंदावन की सुहानी गली में,
देखने रासलीला चलेंगे,
चलेंगे देखने रासलीला चलेंगे।
भोला करने लगे तैयारी,
तन पर बांधी बसंती साड़ी,
कोंधनी नागपुर की कसी है,
देखें शीशे में कैसे लगेंगे,
देखें शीशे में कैसे लगेंगे,
वृंदावन की,
वृंदावन की सुहानी गली में,
देखने रासलीला चलेंगे,
चलेंगे देखने रासलीला चलेंगे।
बोली द्वारे पे ठारी गुजरिया,
गौरा लाई हो नई बहुरिया,
इसका घूंघटा उठा कर दिखा दो,
देखे भोले जी कैसे लगेंगे,
वृंदावन की,
वृंदावन की सुहानी गली में,
देखने रासलीला चलेंगे,
चलेंगे देखने रासलीला चलेंगे।
रास में घुस गये भोले शंकर,
सामने मिल गये श्याम सुंदर,
भेद छिप ना सका भोले जी का,
सोचे भोले जी कैसे बचेंगे,
वृंदावन की,
वृंदावन की सुहानी गली में,
देखने रासलीला चलेंगे,
चलेंगे देखने रासलीला चलेंगे।
BOLE SHANKAR , GAURA HAM BHI JANANI BANENGE | बोले शंकर गौरा हम भी जननी बनेंगे
शंकर जी का मन जब वृंदावन की गलियों की ओर मुड़ता है, तो एक अलग ही उत्साह भर आता है। जैसे कोई बच्चा नई जगह देखने को बेचैन हो जाए। गौरा जी से कहते हैं कि चलो, हम भी जनानी बनकर रासलीला देखने चलें। भोलेनाथ बसंती साड़ी पहनते हैं, कोंधनी कसते हैं, शीशे में खुद को निहारते हैं कि कैसा लग रहा हूँ। घर की बहुरिया समझकर द्वार पर ठहरी गुजरिया घूंघटा उठाने को कहती है। सब कुछ इतना मासूम और प्रेम से भरा है कि हँसी छूट पड़ती है। भगवान का यह रूप दिखाता है कि प्रेम में न पुरुष-स्त्री का भेद रहता है, न कोई नियम। बस दिल की पुकार होती है कि राधा-कृष्ण के रास में शामिल हो जाऊँ।
जब रास में घुसते हैं, तो सामने श्याम सुंदर खड़े मिल जाते हैं। भेद छिप नहीं पाता, भोले जी सोच में पड़ जाते हैं कि अब क्या होगा। लेकिन यही तो लीला का मजा है—जहाँ भगवान खुद अपनी माया में फँसकर भी आनंद लेते हैं। यह सब हमें बताता है कि भक्ति में सच्चा आनंद तब मिलता है जब हम अपने आपको भूल जाते हैं, लिंग-भेद भूल जाते हैं, और सिर्फ प्रेम में डूब जाते हैं। वृंदावन की गलियाँ इसलिए सुहानी हैं क्योंकि वहाँ हर कोई रास का हिस्सा बन सकता है। दिल से पुकारो तो शंकर जी भी जनानी बनकर चल पड़ते हैं। आप सभी पर ईश्वर की कृपा बनी रहे।
रिकार्डिंग लवली विडियो लखनऊ प्रो० श्री हरिशंकर तिवारी जी
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