चारों ललना प्रकट भये आज अवध में लडुआ भजन
चारों ललना प्रकट भये आज अवध में लडुआ भजन
चारों ललना प्रकट भये आज,
अवध में लडुआ बटें,
अरे झीनो-झीनो उड़त गुलाल,
अवध में लडुआ बटें।।
मोतीयन चौक पुराओ सारी बहना,
परदा लगाओ लड़ीदार,
अवध में लडुआ बटें।।
गइयाँ के दूध की खीर बनाओ,
और ब्राह्मण जिमाओ हजार,
अवध में लडुआ बटें।।
अवध में लडुआ बटें,
अरे झीनो-झीनो उड़त गुलाल,
अवध में लडुआ बटें।।
मोतीयन चौक पुराओ सारी बहना,
परदा लगाओ लड़ीदार,
अवध में लडुआ बटें।।
गइयाँ के दूध की खीर बनाओ,
और ब्राह्मण जिमाओ हजार,
अवध में लडुआ बटें।।
Ashok Krishna Thakur Ji - Shri Ram Janm - Charon Lalna Prkat Bhaye Aaj
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Ashok Krishna Thakur Ji - Charon Lalna Prkat Bhaye Aaj Avadh me ladua baten - shri Ram Janm Bhajan
Singer - Pujya Shri Ashok Krishna Thakur Ji Maharaj
Contact Number (9250749704)
Music - Bablu Bhai Musical Group Delhi
Singer - Pujya Shri Ashok Krishna Thakur Ji Maharaj
Contact Number (9250749704)
Music - Bablu Bhai Musical Group Delhi
अवध की धरती उस दिव्य क्षण में अपार आनंद से भर उठती है, जब मर्यादा पुरुषोत्तम के चारों स्वरूपों का प्राकट्य एक साथ लोक-जीवन को आलोकित करता है। वातावरण में उत्सव की ऐसी छटा फैलती है मानो स्वयं प्रकृति भी प्रसन्न होकर पुष्प बरसा रही हो। घर-घर में मंगल ध्वनि गूंजती है और हर ओर श्रद्धा तथा उल्लास का अद्भुत संगम दिखाई देता है। मिठास से भरे लड्डुओं का वितरण केवल भोजन नहीं, बल्कि उस दिव्य प्रेम का प्रतीक बन जाता है जो सबको समान रूप से जोड़ देता है।
गोलियों की तरह उड़ता गुलाल उस आनंद को और भी जीवंत कर देता है, जहाँ भेदभाव मिटकर केवल एकता और भक्ति का भाव शेष रह जाता है। घरों में पवित्रता और सज्जा का ऐसा वातावरण बनता है कि हर हृदय में दिव्यता का अनुभव होने लगता है। गाय के दूध से बनी खीर और सत्कार से भरा भोजन उस संस्कार की झलक देता है जिसमें सेवा और दान को सर्वोच्च स्थान प्राप्त है। ऐसे पावन क्षणों में जीवन स्वयं भक्ति, प्रेम और आनंद का स्वरूप बन जाता है। जय श्रीराम!
गोलियों की तरह उड़ता गुलाल उस आनंद को और भी जीवंत कर देता है, जहाँ भेदभाव मिटकर केवल एकता और भक्ति का भाव शेष रह जाता है। घरों में पवित्रता और सज्जा का ऐसा वातावरण बनता है कि हर हृदय में दिव्यता का अनुभव होने लगता है। गाय के दूध से बनी खीर और सत्कार से भरा भोजन उस संस्कार की झलक देता है जिसमें सेवा और दान को सर्वोच्च स्थान प्राप्त है। ऐसे पावन क्षणों में जीवन स्वयं भक्ति, प्रेम और आनंद का स्वरूप बन जाता है। जय श्रीराम!
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Author - Saroj Jangir
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