मुझे वृन्दावन बुला ले रे ओ कान्हा दीवाने भजन

मुझे वृन्दावन बुला ले रे ओ कान्हा दीवाने भजन


मुझे, वृन्दावन, बुला ले रे... ओ कान्हा दीवाने ॥
मुझे, बाँसुरी, सुना दे रे... ओ कान्हा दीवाने ॥
मैं तो छम, मैं तो छम,
मैं तो, छम छम, छम छम नाचूँगी... ओ कान्हा दीवाने ॥
मुझे, वृन्दावन, बुला ले रे... ओ कान्हा दीवाने ॥।

मुझे, चंदन, बना ले रे... ओ कान्हा दीवाने ॥
तेरे, माथे पे, लग जाऊँगी... ओ कान्हा दीवाने ॥
मैं तो छम, मैं तो छम,
मैं तो, छम छम, छम छम नाचूँगी... ओ कान्हा दीवाने ॥
मुझे, वृन्दावन, बुला ले रे... ओ कान्हा दीवाने ॥।

मुझे, काजल, बना ले रे... ओ कान्हा दीवाने ॥
तेरी, आँखों में, बस जाऊँगी... ओ कान्हा दीवाने ॥
मैं तो छम, मैं तो छम,
मैं तो, छम छम, छम छम नाचूँगी... ओ कान्हा दीवाने ॥
मुझे, वृन्दावन, बुला ले रे... ओ कान्हा दीवाने ॥।

मोहे, माला, बना ले रे... ओ कान्हा दीवाने ॥
तेरे, गले में, पड़ जाऊँगी... ओ कान्हा दीवाने ॥
मैं तो छम, मैं तो छम,
मैं तो, छम छम, छम छम नाचूँगी... ओ कान्हा दीवाने ॥
मुझे, वृन्दावन, बुला ले रे... ओ कान्हा दीवाने ॥।

मुझे, बाँसुरी, बना ले रे... ओ कान्हा दीवाने ॥
तेरे, होंठों से, लग जाऊँगी... ओ कान्हा दीवाने ॥
मैं तो छम, मैं तो छम,
मैं तो, छम छम, छम छम नाचूँगी... ओ कान्हा दीवाने ॥
मुझे, वृन्दावन, बुला ले रे... ओ कान्हा दीवाने ॥।

मोहे, कंगन, बना ले रे... ओ कान्हा दीवाने ॥
तेरे, हाथों में, सज जाऊँगी... ओ कान्हा दीवाने ॥
मैं तो छम, मैं तो छम,
मैं तो, छम छम, छम छम नाचूँगी... ओ कान्हा दीवाने ॥
मुझे, वृन्दावन, बुला ले रे... ओ कान्हा दीवाने ॥।

मोहे, पायल, बना ले रे... ओ कान्हा दीवाने ॥
तेरे, पैरों में, पड़ जाऊँगी... ओ कान्हा दीवाने ॥
मैं तो छम, मैं तो छम,
मैं तो, छम छम, छम छम नाचूँगी... ओ कान्हा दीवाने ॥
मुझे, वृन्दावन, बुला ले रे... ओ कान्हा दीवाने ॥।

मुझे, दासी, बना ले रे... ओ कान्हा दीवाने ॥
तेरी, सेवा में, लग जाऊँगी... ओ कान्हा दीवाने ॥
मैं तो छम, मैं तो छम,
मैं तो, छम छम, छम छम नाचूँगी... ओ कान्हा दीवाने ॥
मुझे, वृन्दावन, बुला ले रे... ओ कान्हा दीवाने ॥।

मोहे, पार, लगा दे रे... ओ कान्हा दीवाने ॥
अपने, चरणों से, लगा ले रे... ओ कान्हा दीवाने ॥
अपना, नाम, जपा ले रे... ओ कान्हा दीवाने ॥
मैं तो छम, मैं तो छम,
मैं तो, छम छम, छम छम नाचूँगी... ओ कान्हा दीवाने ॥
मुझे, वृन्दावन, बुला ले रे... ओ कान्हा दीवाने ॥
बोलिए बाँके बिहारी नंद लाल की... जय ॥


मुझे वृन्दावन बुला ले रे ओ कान्हा दीवाने ठाकुर जी धमाकेदार भजन सुनें और आंनद लें राधे राधे

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वृन्दावन की पुकार में लौट आने की तीव्र चाह है, जहाँ हर सांस श्रीकृष्ण के पास बहा देनी है; नाचती हुई आत्मा की छम-छम में प्रेम का उत्सव झलकता है, जैसे हर कदम श्रीन्हदय की धड़कन से मिलकर मंगल गान करे। माथे पर चँदन, आँखों में काज़ल, गले में माला बन जाना केवल साज नहीं, आत्मा का समर्पण है—देव की सुंदरता में आत्मा को खो देने का आनंद। दासी बनकर सेवा में लीन होना, चरणों से पार लगवाना, नाम जपना—यह सब मिलकर एक निरंतर भक्ति-नृत्य रचता है, जिसमें दूरी मिट जाती है और केवल प्रेम शेष रह जाता है। बाँके बिहारी नंद लाल की जय।
 
Saroj Jangir Author Author - Saroj Jangir

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