श्री गणपति गुरु गौरि पद, प्रेम सहित धरि माथ, चालीसा वन्दन करौं, श्री शिव भैरवनाथ, श्री भैरव संकट हरण, मंगल करण कृपाल, श्याम वरण विकराल, वपु लोचन लाल विशाल।
जय जय श्री काली के लाला, जयति जयति काशी कुतवाला, जयति बटुक भैरव भय हारी, जयति काल भैरव बलकारी।
जयति नाथ भैरव विख्याता, जयति सर्व भैरव सुखदाता, भैरव रूप कियो शिव धारण, भव के भार उतारण कारण।
भैरव रव सुनि है भय दूरी, सब विधि होय कामना पूरी, शेष महेश आदि गुण गायो, काशी कोतवाल कहलायो।
जटा जूट शिर चन्द्र विराजत, बाला मुकुट बिजायठ साजत, कटि करधनी घूँघरू बाजत, दर्शन करत सकल भय भाजत।
जीवन दान दास को दीन्ह्यो, कीन्ह्यो कृपा नाथ तब चीन्ह्यो, वसि रसना बनि सारद काली, दीन्ह्यो वर राख्यो मम लाली।
धन्य धन्य भैरव भय भञ्जन, जय मनरञ्जन खल दल भञ्जन, कर त्रिशूल डमरू शुचि कोड़ा, कृपा कटाक्श सुयश नहिं थोडा।
जो भैरव निर्भय गुण गावत, अष्टसिद्धि नव निधि फल पावत, रूप विशाल कठिन दुख मोचन,
New Bhajan 2023
क्रोध कराल लाल दुहुँ लोचन।
अगणित भूत प्रेत सङ्ग डोलत, बं बं बं शिव बं बं बोलत, रुद्रकाय काली के लाला, महा कालहू के हो काला।
बटुक नाथ हो काल गँभीरा, श्वेत रक्त अरु श्याम शरीरा, करत नीनहूँ रूप प्रकाशा, भरत सुभक्तन कहँ शुभ आशा।
रत्न जड़ित कञ्चन सिंहासन, व्याघ्र चर्म शुचि नर्म सुआनन, तुमहि जाइ काशिहिं जन ध्यावहिं, विश्वनाथ कहँ दर्शन पावहिं।
जय प्रभु संहारक सुनन्द जय, जय उन्नत हर उमा नन्द जय, भीम त्रिलोचन स्वान साथ जय, वैजनाथ श्री जगतनाथ जय।