ऐ दो जहां के मालिक मेरी खता बता दे, चरणों से दूर दाता तूने क्यों किया बता दे, ऐ दो जहां के मालिक मेरी खता बता दे।
जीने को जी रहा हूं लेकिन मजा नहीं है, तुझसे जो दूरियां हैं क्या ये सजा नहीं है, मुझे थाम ले दयालु ये फासले मिटा दे, ऐ दो जहां के मालिक मेरी खता बता दे।
दुनिया की दौलतों की चाहत नहीं है दाता, चरणों में बस जगह तू देदे मेरे विधाता,
हाथों को मेरे सर पे जरा प्यार से फिरा दे, ऐ दो जहां के मालिक मेरी खता बता दे।
तेरे पथ पे चल रहा हूं इक दिन तो तू मिलेगा, उम्मीद का ये दीपक एक दिन प्रभु जलेगा, तेरे हर्ष के हृदय का अंधियारा तू मिटा दे, ऐ दो जहां के मालिक मेरी खता बता दे।
Maalik | ऐ दो जहाँ के मालिक मेरी खता बतादे | Kumar Deepak | Bageshwar Dham Sarkar Superhit Bhajan
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Aie Do Jaha Ke Malik Meri Khata Bata De, Charanon Se Door Daata Tune Kyu Kiya Bata De, Aie Do Jaha Ke Malik Meri Khata Bata De.
Jeene Ko Jee Raha Hoon Lekin Maza Nahin Hai, Tujhse Jo Dooriyan Hain Kya Ye Saza Nahin Hai, Mujhe Thaam Le Dayalu Ye Faasle Mita De, Aie Do Jaha Ke Malik Meri Khata Bata De.
Duniya Ki Daulat Ki Chahat Nahin Hai Daata, Charanon Mein Bas Jagah Tu Dede Mere Vidhata, Haathon Ko Mere Sar Pe Zara Pyar Se Phira De, Aie Do Jaha Ke Malik Meri Khata Bata De.
Tere Path Pe Chal Raha Hoon Ek Din To Tu Milega, Umeed Ka Ye Deepak Ek Din Prabhu Jalega, Tere Harsh Ke Hriday Ka Andhiyaara Tu Mita De, Aie Do Jaha Ke Malik Meri Khata Bata De.