मिट्टी श्री आनंदपुर दी ऐ सतगुरु भजन
मिट्टी श्री आनंदपुर दी ऐ सतगुरु भजन
मिट्टी श्री आनंदपुर दी ऐ,
चंगे तेरे भाग ने,
जिथ्थे आ विराजे,
परमहंस महाराज ने।
इस पावन धरती नूं,
देवते शीश निवोंदें नें,
ओ छड़के स्वर्गां नूं,
तेरे दर्शन नूं ओंदें ने।
सजदियां महफ़िलां,
ते हुंदे रंगराज ने,
जिथ्थे आ विराजे,
परमहंस महाराज ने।
चारां ही दिशावां तों,
संगतां ओंदियां तुरियां नें,
सतगुरां दे द्ववारे तों,
मुरादा लैके मुड़ियां नें।
दिन-रात मेहरां वाले,
जगदे चिराग ने,
जिथ्थे आ विराजे,
परमहंस महाराज ने।
चरणां नूं छू छू के,
मस्त हवांवां ओंदियां ने,
तेरा वसदा रवे दरबार,
दातेया खैर मनोदियां नें।
मोती बाग विच्च वेखों,
महकदे गुलाब नें,
जिथ्थे आ विराजे,
परमहंस महाराज ने।
धरती दे मालिक ने,
ओ डुबदे पार लगोंदें नें,
दुनिया दे वाली ने,
ओ परमहंस कहलांदे नें।
हुंदे ने जी सारे ऐथे,
लेखां दे हिसाब नें,
जिथ्थे आ विराजे,
परमहंस महाराज नें।
चंगे तेरे भाग ने,
जिथ्थे आ विराजे,
परमहंस महाराज ने।
इस पावन धरती नूं,
देवते शीश निवोंदें नें,
ओ छड़के स्वर्गां नूं,
तेरे दर्शन नूं ओंदें ने।
सजदियां महफ़िलां,
ते हुंदे रंगराज ने,
जिथ्थे आ विराजे,
परमहंस महाराज ने।
चारां ही दिशावां तों,
संगतां ओंदियां तुरियां नें,
सतगुरां दे द्ववारे तों,
मुरादा लैके मुड़ियां नें।
दिन-रात मेहरां वाले,
जगदे चिराग ने,
जिथ्थे आ विराजे,
परमहंस महाराज ने।
चरणां नूं छू छू के,
मस्त हवांवां ओंदियां ने,
तेरा वसदा रवे दरबार,
दातेया खैर मनोदियां नें।
मोती बाग विच्च वेखों,
महकदे गुलाब नें,
जिथ्थे आ विराजे,
परमहंस महाराज ने।
धरती दे मालिक ने,
ओ डुबदे पार लगोंदें नें,
दुनिया दे वाली ने,
ओ परमहंस कहलांदे नें।
हुंदे ने जी सारे ऐथे,
लेखां दे हिसाब नें,
जिथ्थे आ विराजे,
परमहंस महाराज नें।
Mitti Shri Anandpur di | SSDN bhajan| Anandpur Bhajans| Suman Sharma| Komal Sharma|
श्री आनंदपुर साहिब की पावन मिट्टी हर साधक के भाग्य को चमका देती है। यहां देवता भी शीश नवाते हैं, स्वर्ग से उतरकर दर्शन पाने को बेताब रहते हैं। सजदे और महफिलें रंग भर देती हैं, चारों दिशाओं से संगतें तुरियां लेकर आती हैं। सतगुरु के द्वार से मुरादें पूरी होकर लौटती हैं, दिन-रात मेहरबान जग के चिराग जलाते रहते हैं।
चरण छूकर हवाएं भी मस्त हो जाती हैं, दरबार हमेशा रौनक से भरा रहता है। मोती बाग में गुलाब महकते हैं, धरती के मालिक डुबते को पार लगाते हैं। दुनिया के वली यहीं परमहंस कहलाते हैं, जी सारे लेखों के हिसाब तय होते हैं। इश्वर का आशर्वाद आप सभी पर बना रहे। जय श्री गुरु गोबिंद सिंह जी की।
Bhajan name: मिट्टी श्री आनंदपुर दी
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