मेरे मन में गुरूवर आये मन मेरा पावन हुआ जैन भजन

मेरे मन में गुरूवर आये मन मेरा पावन हुआ जैन भजन


मेरे मन में गुरुवर आये,
मन मेरा पावन हुआ,
सुख ही सुख के बादल छाए,
समता का सावन हुआ।

भटका रहा मैं भव-भव में लेकिन,
गुरु की शरण न मिली,
अब जाकर गुरु की वाणी सुनी है,
ज्ञान की ज्योत जली,
जिनवर की वाणी,
गुरुवर के मुख से,
लगती है ऐसी भली,
सुनकर के जिसको,
पुलकित हृदय में,
संयम की बगिया खिली,
भेद-ज्ञान के पुष्पों से मेरा,
जीवन मनभावन हुआ,
सुख ही सुख के बादल छाए,
समता का सावन हुआ।

मन में मेरे बस है एक इच्छा,
चरणों में गुरु के रहूँ,
गुरुवर को देखूँ गुरुवर को सोचूँ,
गुरुवर ही मुख से कहूँ,
गुरु ने जो मुझको,
राह दिखाई,
उस पर सदा ही चलूँ,
गुरु मेरे एक दिन,
भगवान बनेंगे,
मैं भी उन्हीं सा बनूँ,
जिनवाणी की फैली सुगंधी,
मन मेरा मधुवन हुआ,
सुख ही सुख के बादल छाए,
समता का सावन हुआ।

मेरे मन में गुरुवर आये,
मन मेरा पावन हुआ,
सुख ही सुख के बादल छाए,
समता का सावन हुआ।



Mere Man Me Guruvar Aaye | Acharya Vidyasagar Ji Maharaj Bhajan | Jain Bhajan 2024 | Jain Song 

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Presenting this beautiful & Soulful Jain Bhajan 'मेरे मन में गुरूवर आये'.
Lyrics, Music (Re-created) & Sung by:
Dr. Rajeev Jain (Chandigarh)
Original Composition: Bappi Lahiri
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Saroj Jangir Author Author - Saroj Jangir

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