अपनाया है कितनो को मुझको अपनाना भजन
अपनाया है कितनो को मुझको अपनाना भजन
अपनाया है कितनों को,
मुझको अपनाना,
कहलाऊँ मैं भी प्रभु,
तेरा दीवाना।
जन्मों जन्म का बाबा,
नाता हो तेरा मेरा,
बेगानों के शहर में,
है मेरा पर बसेरा,
कैसे निभेगी अपनी,
कोई जोग तू बिठाना,
अपनाया है कितनों को,
मुझको अपनाना।
मैं जानता हूँ मेरी,
ख्वाहिश बहुत बड़ी है,
छूटेगी कैसे संग जो,
पापों की भी लड़ी है,
संभव तभी अगर हो,
तेरा इसे भूलाना,
अपनाया है कितनों को,
मुझको अपनाना।
अपनाया है कितनों को,
मुझको अपनाना,
कहलाऊँ मैं भी प्रभु,
तेरा दीवाना।
मुझको अपनाना,
कहलाऊँ मैं भी प्रभु,
तेरा दीवाना।
जन्मों जन्म का बाबा,
नाता हो तेरा मेरा,
बेगानों के शहर में,
है मेरा पर बसेरा,
कैसे निभेगी अपनी,
कोई जोग तू बिठाना,
अपनाया है कितनों को,
मुझको अपनाना।
मैं जानता हूँ मेरी,
ख्वाहिश बहुत बड़ी है,
छूटेगी कैसे संग जो,
पापों की भी लड़ी है,
संभव तभी अगर हो,
तेरा इसे भूलाना,
अपनाया है कितनों को,
मुझको अपनाना।
अपनाया है कितनों को,
मुझको अपनाना,
कहलाऊँ मैं भी प्रभु,
तेरा दीवाना।
अपनाया है कितनो को मुझको आपना |Sanjay mittal ji new bhajan |khatu shyam ji bhajan|barbarika97
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Author - Saroj Jangir
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