तुम्हारी रजा में ना राजी रहा मैं भजन
तुम्हारी रजा में ना राजी रहा मैं भजन
तुम्हारी रजा में ना राजी रहा मैं,
शायद इसी की सजा मिल रही है,
मेरे मन जो आया वो करता रहा मैं,
शायद इसी की सजा मिल रही है।।
सोचा था तुमने भला मेरी खातिर,
मगर मैं ना समझा ऐसा हूं काफिर,
दुनिया की मौजों में उलझा रहा मैं,
शायद इसी की सजा मिल रही है।।
दिए थे प्रभु तुमने हमको इशारे,
मगर आंख पे थे परदे हमारे,
परदों की परतों में उलझा रहा मैं,
शायद इसी की सजा मिल रही है।।
किया स्नेह तुमने समझ मैं ना पाया,
देर हो चुकी थी तब ही समझ में आया,
लुटाता रहा तू उड़ाता रहा मैं,
शायद इसी की सजा मिल रही है।।
तुम्हारी रजा में ना राजी रहा मैं,
शायद इसी की सजा मिल रही है,
मेरे मन जो आया वो करता रहा मैं,
शायद इसी की सजा मिल रही है।।
शायद इसी की सजा मिल रही है,
मेरे मन जो आया वो करता रहा मैं,
शायद इसी की सजा मिल रही है।।
सोचा था तुमने भला मेरी खातिर,
मगर मैं ना समझा ऐसा हूं काफिर,
दुनिया की मौजों में उलझा रहा मैं,
शायद इसी की सजा मिल रही है।।
दिए थे प्रभु तुमने हमको इशारे,
मगर आंख पे थे परदे हमारे,
परदों की परतों में उलझा रहा मैं,
शायद इसी की सजा मिल रही है।।
किया स्नेह तुमने समझ मैं ना पाया,
देर हो चुकी थी तब ही समझ में आया,
लुटाता रहा तू उड़ाता रहा मैं,
शायद इसी की सजा मिल रही है।।
तुम्हारी रजा में ना राजी रहा मैं,
शायद इसी की सजा मिल रही है,
मेरे मन जो आया वो करता रहा मैं,
शायद इसी की सजा मिल रही है।।
Tumhari Raza Mein Na Raazi Raha Main | Sanjay Mittal | Shyam Baba Bhajan | Kamna Siddhi Darbaar
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